
Rajasthan Mukhyamantri Nishulk Dava Yojna: राजस्थान की महत्वाकांक्षी निशुल्क दवा योजना इन दिनों दवाओं की कमी से जूझ रही है। योजना के तहत 800 से अधिक प्रकार की दवाएं सूचीबद्ध हैं, लेकिन वर्तमान में चिकित्सा संस्थानों को इनमें से आधी से भी कम दवाओं की नियमित आपूर्ति हो पा रही है। इसका सबसे अधिक असर मेडिकल कॉलेजों से जुड़े बड़े अस्पतालों पर पड़ रहा है, जहां गंभीर और जटिल रोगों के मरीजों का उपचार किया जाता है।
चिकित्सकों के अनुसार वर्तमान में अस्पतालों को केवल 250 से 300 प्रकार की दवाओं की ही आपूर्ति मिल रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में सीमित दवाओं से काम चल जाता है, लेकिन मेडिकल कॉलेज स्तर के अस्पतालों में विशेषज्ञ उपचार के लिए बड़ी संख्या में विभिन्न दवाओं की आवश्यकता होती है। ऐसे में कई जरूरी दवाओं की कमी मरीजों और चिकित्सकों दोनों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
प्रदेश में निशुल्क दवाओं की खरीद और वितरण की जिम्मेदारी राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) के पास है। पिछले कई महीनों से दवाओं की सप्लाई व्यवस्था प्रभावित है। कई दवाओं के टेंडर, आपूर्ति और स्टॉक प्रबंधन से जुड़े कारणों के चलते अस्पतालों तक पर्याप्त मात्रा में दवाएं नहीं पहुंच पा रही हैं।
अनेक जीवनरक्षक दवाएं भी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो रही हैं। मरीजों का उपचार प्रभावित न हो, इसके लिए मेडिकल कॉलेज अस्पतालों को एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) प्रक्रिया के तहत बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। इससे जहां अस्पतालों पर अतिरिक्त प्रशासनिक और वित्तीय दबाव बढ़ रहा है, वहीं कई बार मरीजों को भी दवा उपलब्ध होने तक भटकना पड़ता है।
आरएमएससीएल के आआइसी डॉ. राकेश पासी बताते हैं कि कुछ अर्जेन्ट जरूरत की दवाएं अस्पताल खरीदते हैं, बाकी सप्लाई यथावत रखने को प्रयास कर रहे हैं। अभी कुछ दवाओं के पर्चेट ऑर्डर भी जारी हुए हैं। इधर, एमजीएच अस्पताल के अधीक्षक और अतिरिक्त प्रधानाचार्य डॉ एफ एस भाटी ने बताया कि दवाओं की आपूर्ति कम है, लेकिन जिस मरीज को दवा लिख दी जाती है उसे उपलब्ध करवाने का पूरा प्रयास करते हैं।
कोटा और बीकानेर में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने में एक पेच यह भी सामने आया कि वहां बाहर से दवा खरीदी गई थी। यह इसी कारण है क्योंकि आरएमएससीएल की दवा आपूर्ति सीमित हो रखी है। इसी कारण प्रसव के दौरान व बाद में उपयोग होने वाली दवाएं खरीदी जा रही है। यही हालात जोधपुर सहित अन्य मेडिकल कॉलेज में भी देखने को मिल रहे हैं।