जोधपुर

ऋण माफी: जहां भी जांच कराई, वहां निकला घोटाला

jodhpur news - राज्य सरकार ने 33 जिलों में 2018 व 2019 की ऋण माफी जांच के दिए आदेश- 8 साल से किसानों को ऋण माफी कर रही है सरकार
2 min read
ऋण माफी: जहां भी जांच कराई, वहां निकला घोटाला
ऋण माफी: जहां भी जांच कराई, वहां निकला घोटाला

जोधपुर. किसानों के लिए वर्ष 2018 और 2019 में हुई फसली ऋण माफी योजना में जहां भी गड़बड़ी की जांच करवाई गई, वहां घोटाला सामने आ गया। चाहे जैसलमेर-जालोर हो या करोली-डूंगरपुर, हर जिले की कई ग्राम सेवा सहकारी समितियों (जीएसएस) में फर्जी लोगों को ऋण देकर फर्जी माफी की गई। इस पर अब सरकार ने गुरुवार को प्रदेश के समस्त 33 जिलों के डिप्टी रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर ऋण माफी योजना 2018 और 2019 की रेंडम जांच करने के आदेश दिए हैं। अतिरिक्त रजिस्ट्रार भोमाराम ने अनियमितता उजागर करने और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई को लिखा है।

6 साल लोन ले रहे किसान 7 वे साल गायब हो गए
प्रदेश में फसली ऋण माफी योजना की शुरुआत वित्तीय वर्ष 2012-13 में हुई। वसुंधरा सरकार ने अधिकतम 50 हजार रुपए के लोन माफी की। जो 2018 तक चलती रही। इस दौरान प्रदेश की अधिकांश जीएसएस में संचालक मण्डल और व्यवस्थापकों ने मिलकर फर्जी नाम से लोन उठाए भी और उसकी ऋण माफी भी कर ली। दिसम्बर 2018 में अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री बनने के बाद फसली ऋण माफी सीमा बढ़ाकर 2 लाख रुपए कर दी, लेकिन अब ऋण माफी आधार कार्ड से अटैच करने के साथ जनसूचना सम्पर्क पोर्टल पर ऋण माफ करवाने वालों की सूचियां भी डाली गई। दो शर्तें जोड़ते ही 2019 में लोन लेने वाले व ऋण माफ करवाने वाले अचानक से कम हो गए, जबकि ऋण माफी 2 लाख तक दी जा रही थी। कारण यह था कि जीएसएस संचालक फर्जी लोगों का आधार कार्ड उपलब्ध नहीं करवा पाए।

जैसलमेर में 41 किसानों ने पोर्टल पर देखा, ऋण माफ हो गया
जन सूचना सम्पर्क पोर्टल पर ऋण माफी प्राप्तकत्र्ताओं की सूची डालते ही किसानों ने उसे देखना शुरू किया। जैसलमेर जिले की मानासार जीएसएस में वर्ष 2018 में 41 लोगों के नाम 9.50 लाख रुपए का फर्जी ऋण उठाया गया। इन लोगों द्वारा पोर्टल पर अपना नाम देखने के बाद इसका खुलासा हुआ। जालोर जिले में बलवाड़ा सहित सात जीएसएस की जांच में करोड़ों रुपए का गबन सामने आया।

बैंकों के पास पैसा पड़ा, अब नहीं ले जा रहे जीएसएस
वर्ष 2019 से पहले जीएसएस संचालक करोड़ों रुपए की लोन माफी दिखाकर केंद्रीय सहकारी बैंकों से लगातार ऋण मांगते रहते थे जबकि बैंकों के पास उनको देने के लिए पैसे नहीं थे। अब बैंकों के पास ओवर ड्यू पड़े हैं लेकिन जीएसएस उनसे लोन नहीं ले रहे हैं।

Published on:
02 Oct 2020 11:50 pm