जोधपुर

Teacher News: राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 10 हजार सरकारी शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता साफ, कई याचिकाएं खारिज

Rajasthan High Court: राजस्थान हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के सेवा नियमों में किए गए संशोधन को सही मानते हुए कई याचिकाएं खारिज कर दीं। फैसले के बाद प्रदेश के करीब 10 हजार सीनियर शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है।

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May 23, 2026
Government teacher
सांकेतिक फाइल फोटो- पत्रिका

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अध्यापक (सामान्य) की पदोन्नति से जुड़े राजस्थान शैक्षणिक (राज्य एवं अधीनस्थ) सेवा प्रथम संशोधन नियम-2024 को वैध ठहराते हुए उसके खिलाफ दायर कई याचिकाएं खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से किया गया संशोधन मनमाना नहीं है और इसका उद्देश्य लंबे समय से पदोन्नति से वंचित वरिष्ठ अध्यापक (सामान्य) वर्ग के करीब दस हजार कार्मिकों के हितों की रक्षा करना था।

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न्यायाधीश अरुण मोंगा व न्यायाधीश संदीप शाह की खंडपीठ ने यह फैसला नवीन कुमार बाबेल सहित कई शिक्षकों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाओं में राजस्थान शैक्षणिक (राज्य एवं अधीनस्थ) सेवा प्रथम संशोधन नियम-2024 के नियम 5 उपनियम (2) के खंडों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि 7 फरवरी, 2024 को जारी संशोधन के जरिए वरिष्ठ अध्यापक की जगह वरिष्ठ अध्यापक (सामान्य) शब्द जोड़ दिया गया, जिससे लेक्चरर पद पर पदोन्नति का 50 प्रतिशत कोटा केवल वरिष्ठ अध्यापक (सामान्य) तक सीमित हो गया।

पदोन्नति के अवसर खत्म हो गए

उनका आरोप था कि इससे विषय विशेष के वरिष्ठ अध्यापकों के पदोन्नति के अवसर खत्म हो गए। यह भी तर्क दिया गया कि पदोन्नति के लिए 3 अगस्त, 2021 की कट-ऑफ तारीख तय करने का कोई तार्किक आधार नहीं है। संशोधन में यह प्रावधान किया गया था कि जिन शिक्षकों ने इस अवधि से पहले स्नातक और स्नातकोत्तर अलग-अलग विषयों में किया है, उन्हें भी पदोन्नति के लिए पात्र माना जाएगा। सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार ने अदालत को बताया कि वर्ष 2021 के नियम लागू होने के बाद करीब 10 हजार वरिष्ठ अध्यापक (सामान्य) ऐसे थे, जिनके लिए आगे पदोन्नति का कोई रास्ता नहीं बचा था। इन्हीं कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए 2024 का संशोधन लाया गया।

सरकार ने कहा- यह एक अस्थाई व्यवस्था

सरकार ने कहा कि यह एक अस्थाई व्यवस्था है और पात्र वरिष्ठ अध्यापक (सामान्य) के पदोन्नत होने तक ही लागू रहेगी। उसके बाद संबंधित पद सीधे भर्ती से भरे जाएंगे। खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि वरिष्ठ अध्यापक और वरिष्ठ अध्यापक (सामान्य) शुरू से ही अलग-अलग वर्ग रहे हैं और दोनों की भर्ती एवं पदोन्नति की व्यवस्था भी अलग रही है। कोर्ट ने माना कि सरकार की ओर से किया गया वर्गीकरण तार्किक है और इसका सीधा संबंध उस उद्देश्य से है, जिसे हासिल करना चाहा गया।

खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि संशोधन संविधान के किसी प्रावधान का उल्लंघन करता है या राज्य सरकार ने अपनी विधायी शक्तियों से बाहर जाकर नियम बनाए हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि याचिकाकर्ताओं के पदोन्नति के अवसर पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं, क्योंकि वे अपने विषय के अनुसार उपलब्ध रिक्तियों और वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति के लिए विचारणीय रहेंगे।

Updated on:
23 May 2026 06:35 pm
Published on:
23 May 2026 04:34 pm