
डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज। फाइल फोटो- पत्रिका
जोधपुर। कोटा के बाद अब बीकानेर में प्रसूताओं में किडनी खराब होने के सामने आए मामलों ने चिकित्सा विभाग की चिंता बढ़ा दी है। इन मामलों के कारणों की जांच और स्थिति का विस्तृत अध्ययन करने के लिए डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज, जोधपुर से विशेषज्ञों की सात सदस्यीय टीम बीकानेर भेजी गई है। वहीं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों से भी ऐसे मामलों की जानकारी तलब की है। जोधपुर से भेजी गई टीम में फिजिशियन, प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (पीएसएम), नेफ्रोलॉजी, गायनिक और माइक्रोबायोलॉजी विभागों के विशेषज्ञ शामिल हैं।
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यह टीम बीकानेर में प्रसूताओं की स्वास्थ्य स्थिति, उपचार प्रक्रिया और किडनी संबंधी जटिलताओं के संभावित कारणों का अध्ययन करेगी। विभाग यह जानने का प्रयास करेगा कि प्रसव के दौरान या प्रसव के बाद महिलाओं में इस प्रकार की समस्याएं किन परिस्थितियों में उत्पन्न हो रही हैं। इधर, जोधपुर में अब तक प्रसूता की किडनी खराब होने का कोई मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर निगरानी बढ़ा दी है। मेटरनल डेथ ऑडिट और गंभीर मामलों की समीक्षा को लेकर सभी विभागाध्यक्षों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं।
अस्पताल प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि यदि किसी भी विभाग में कोई महिला प्रसव पूर्व या प्रसव के बाद गंभीर अवस्था में भर्ती होती है अथवा उसकी मृत्यु होती है तो इसकी सूचना तत्काल अस्पताल प्रशासन और मेडिकल कॉलेज को दी जाए। इससे ऐसे मामलों की समय पर समीक्षा की जा सकेगी और आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि निगरानी और रिपोर्टिंग व्यवस्था को मजबूत बनाकर संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान की जा सकती है। साथ ही मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी।
हमारे यहां प्रत्येक मातृ मृत्यु का नियमित ऑडिट किया जाता है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के निर्देश पर सात सदस्यीय टीम बीकानेर भेजी गई है।
Updated on:
09 Jun 2026 09:25 pm
Published on:
09 Jun 2026 09:23 pm
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