जोधपुर

Rajasthan: क्या RTI से मिलेगी पति के वेतन की जानकारी? हाई कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

RTI Act: राजस्थान हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत एक पत्नी अपने पति की सैलरी स्लिप या वेतन विवरण नहीं मांग सकती। यह फैसला निजता के अधिकार को प्राथमिकता देता है और स्पष्ट करता है कि व्यक्तिगत सेवा रिकॉर्ड सार्वजनिक दस्तावेज नहीं हैं।
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Feb 24, 2026
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High Court news: पति-पत्नी के बीच चल रहे विवादों में अक्सर आय और सैलरी की जानकारी अहम मुद्दा बन जाती है। राजस्थान में एक महिला ने अपने पति की सैलरी स्लिप जानने के लिए RTI (सूचना का अधिकार) का सहारा लिया। मामला अदालत तक पहुंचा और राजस्थान हाई कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया जो हर आम नागरिक को जानना चाहिए।

इस मामले पर राजस्थान हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि पत्नी सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत अपने पति की सैलरी डिटेल्स नहीं मांग सकती। अदालत ने कहा है कि किसी कर्मचारी की वेतन संबंधी जानकारी “निजी सूचना” (Personal Information) है और इसे बिना किसी बड़े जनहित के सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

जानिए पूरा मामला

यह मामला एक महिला से जुड़ा है, जिन्होंने आरटीआई आवेदन के जरिए अपने पति की जनवरी से मार्च 2024 तक की वेतन पर्चियां और सैलरी विवरण मांगा था। सूचना अधिकारी ने यह जानकारी देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि यह तीसरे पक्ष की निजी सूचना है। बाद में राजस्थान राज्य सूचना आयोग ने भी विभाग के फैसले को बरकरार रखा। इसके खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

कोर्ट का फैसला

अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय Girish Ramchandra Deshpande बनाम CIC का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के सेवा रिकॉर्ड, वेतन, संपत्ति और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां निजी सूचना की श्रेणी में आती हैं और इन्हें बिना उचित कारण सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

  • RTI से सरकारी नीतियां, खर्च, टेंडर, भर्ती प्रक्रिया जैसी जानकारियां मांगी जा सकती हैं। किसी व्यक्ति विशेष की सैलरी, बैंक डिटेल या निजी रिकॉर्ड RTI के दायरे से बाहर हैं।
  • इसके साथ ही यह भी बताया कि सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(j) के तहत ऐसी निजी जानकारी का खुलासा नहीं किया जा सकता, जब तक कि कोई स्पष्ट और बड़ा जनहित साबित न हो।

राजस्थान हाईकोर्ट का यह फैसला निजता के अधिकार और सूचना के अधिकार के बीच संतुलन को एक बार फिर स्पष्ट करता है। यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों में मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकता है, जहां व्यक्तिगत जानकारी और पारदर्शिता के अधिकार के बीच टकराव की स्थिति बनती है।

Updated on:
24 Feb 2026 04:24 pm
Published on:
24 Feb 2026 03:10 pm