जोधपुर

राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मचारियों को भी मिलेगा न्यूनतम वेतन, 60 दिन में लागू करने के निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि प्लेसमेंट एजेंसी से नियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी न्यूनतम वेतनमान के हकदार हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को 60 दिन में आदेश जारी करने के निर्देश दिए।
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Updated: 7 Nov 2026, 10:03 PM IST
rajasthan high court orders minimum wages for placement agency
राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला, प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मचारियों को भी मिलेगा न्यूनतम वेतन (पत्रिका क्रिएटिव फोटो)

Rajasthan High Court: जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से नियुक्त होने मात्र के आधार पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की याचिकाएं स्वीकार करते हुए उन्हें विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए लागू न्यूनतम वेतनमान देने के आदेश जारी करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार को फैसले की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 60 दिन के भीतर इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी करने होंगे।

दो कर्मचारियों की याचिकाओं पर सुनाया फैसला

न्यायाधीश कुलदीप माथुर की एकल पीठ ने सुनील कटारा और अनिल कुमार पारगी की याचिकाओं पर यह आदेश दिया। सुनील कटारा बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय में चपरासी के पद पर कार्यरत हैं, जबकि अनिल कुमार पारगी जनजाति क्षेत्रीय विकास कार्यालय, बांसवाड़ा में चौकीदार के पद पर कार्यरत हैं।

नियमित कर्मचारियों के समान काम, फिर भी नहीं मिल रहा था लाभ

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि वे विभाग में चतुर्थ श्रेणी के विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं और नियमित कर्मचारियों के समान काम कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम वेतनमान का लाभ नहीं दिया जा रहा है। विभाग की ओर से तर्क दिया गया कि दोनों कर्मचारियों की नियुक्ति प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से हुई है, इसलिए वे न्यूनतम वेतनमान के लाभ के पात्र नहीं हैं।

कोर्ट ने पुराने फैसले का दिया हवाला

राजस्थान हाईकोर्ट ने इसी विभाग के एक अन्य कर्मचारी धीरिया के मामले में 8 अप्रैल 2026 को दिए गए फैसले का उल्लेख किया। उस मामले में भी समान परिस्थितियों में कर्मचारी को न्यूनतम वेतनमान देने के निर्देश दिए गए थे। पीठ ने कहा कि प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से नियुक्ति और नियमित चयन प्रक्रिया से नियुक्त नहीं होने का मुद्दा पहले ही उस फैसले में विचार किया जा चुका है।

नियोक्ता-कर्मचारी संबंध विवादित नहीं

पीठ ने यह भी माना कि याचिकाकर्ताओं और विभाग के बीच नियोक्ता-कर्मचारी का संबंध विवादित नहीं है। ऐसे में केवल नियमित चयन प्रक्रिया से नियुक्त नहीं होने के आधार पर उन्हें न्यूनतम वेतनमान के लाभ से वंचित करने का विभाग का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि फैसले की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 60 दिन के भीतर याचिकाकर्ताओं को न्यूनतम वेतनमान का लाभ देने के लिए आवश्यक आदेश जारी किए जाएं।

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7 Nov 2026, 10:03 PM IST
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