
Rajasthan High Court : जोधपुर.राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर जिले में पुलिस अधीक्षक का पद लंबे समय से खाली रहने और आगामी निकाय चुनावों के मद्देनजर एसपी पद पर आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रशासनिक मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस मुद्दे पर राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष नया अभ्यावेदन पेश करने की छूट दी है। आयोग को अभ्यावेदन पर कानून के अनुसार निर्णय करने के निर्देश दिए गए हैं।
न्यायाधीश पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायाधीश बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की ओर से दायर जनहित याचिका का निस्तारण किया। पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि अनिल बारूपाल खुद कोर्ट में उपस्थित हुए। याचिका में नागौर के पुलिस अधीक्षक के रिक्त पद पर भारतीय पुलिस सेवा संवर्ग के अधिकारी की नियुक्ति की मांग की गई थी।
याचिका के अनुसार नागौर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक का 19 मई 2026 को तबादला होने के बाद पद रिक्त है। याचिकाकर्ता ने कहा कि 19 अगस्त को कार्मिक विभाग ने पुलिस अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंप दिया, जबकि निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष, निर्भीक और स्वतंत्र चुनाव के लिए जिला कलक्टर और पुलिस अधीक्षक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया था।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद नागौर में SP की नियुक्ति का मामला अब चुनाव आयोग के समक्ष जाएगा। अदालत ने फिलहाल SP की नियुक्ति को लेकर सीधे कोई आदेश जारी नहीं किया है, बल्कि RLP को अपनी मांग चुनाव आयोग के सामने रखने का निर्देश दिया है। अब RLP की ओर से चुनाव आयोग के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद आयोग इस मामले में याचिकाकर्ता की मांग और उठाए गए मुद्दों पर विचार करते हुए उचित निर्णय लेगा।
आरएलपी सुप्रीमो व नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट X पर यह महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए लिखा कि नागौर जैसे महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील जिले में भी निकाय चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, ऐसे समय में जिला पुलिस अधीक्षक का पद अतिरिक्त कार्यभार के भरोसे चलाया जाना सरकार की नीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
नागौर में आईपीएस अधिकारी होने के बावजूद आरपीएस रैंक के अधिकारी को एसपी का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। जब चुनाव निष्पक्ष, स्वतंत्र और भयमुक्त वातावरण में करवाने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की है, तब एसपी जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियमित आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही? मैंने राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त व राजस्थान सरकार के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र भेजकर तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
साथ ही, RLP की ओर से इस मामले को लेकर माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय में प्रस्तुत जनहित याचिका का भी हवाला दिया है। सरकार और निर्वाचन आयोग को यह समझना होगा कि लोकतंत्र में चुनाव सिर्फ करवाना पर्याप्त नहीं है, चुनाव पर जनता का भरोसा कायम रखना भी जरूरी है।