
राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर शहर और आस-पास क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर एक बार फिर चिंता जताई है। एक इंजीनियरिंग छात्र के चार माह पहले शहर में लापता होने के मामले में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के बाद जस्टिस गोविंद माथुर व जस्टिस विनीतकुमार माथुर की खंडपीठ ने लिखित टिप्पणी करते हुए कहा कि लगता है कि इस क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियां संचालित करने वालों को कानून के रखवालों का कोई डर नही है। यह अजीब स्थिति है कि असामाजिक तत्वों ने पूरे समाज को फिरौती पर चढ़ा दिया है। वे अपनी आपराधिक कारगुजारियों के लिए बेकसूर लोगों को डरा-धमका रहे हैं। खंडपीठ ने यह टिप्पणी आखलिया चैराहा स्थित बरकतुल्लाह खान कॉलोनी निवासी रेणू मकवाना की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान की।
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता शीतल कुम्भट ने बताया कि 20 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र कपिल मालवीया 18 मई 2017 को घर से गायब हो गया था। इसके तुरंत बाद एफआइआर दर्ज कराई गई, लेकिन आज तक पुलिस ने इस मामले में गंभीरता से अनुसंधान नहीं किया। छात्र की मां ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की, लेकिन कोर्ट से जारी निर्देशों के बावजूद पुलिस सुराग नहीं लगा सकी।
कमिश्नर को निर्देश
सुनवाई के बाद खंडपीठ ने जोधपुर पुलिस कमिश्नर को निर्देश जारी करते हुए एक उपअधीक्षक स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में जांच समिति गठित करने व उसकी मॉनिटरिंग खुद कमिश्नर को करने सहित दो सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए। मामले में जांच की प्रगति अतिरक्त सचिव गृह विभाग को भी अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी।
आपको बताते चलें कि सरदारपुरा सी रोड पर मोबाइल व्यवसायी की गोली मारने वाले भोमाराम विश्नोई व साजिश में शामिल हरेन्द्र उर्फ हीरा जाट को पुलिस पच्चीस दिन बाद भी पकड़ नहीं पाई है। अलबत्ता पुलिस ने बुधवार को वह मोटरसाइकिल बरामद कर ली, जिस पर सवार होकर भोमाराम ने मोबाइल व्यवसायी वासुदेव को गोली मारी थी। रैकी में प्रयुक्त एक अन्य बाइक भी बरामद की गई है।