जोधपुर

राजस्थान की ये महिला IAS अधिकारी गेंहू घोटाले में है फरार, अब एसीबी ने लटकाई केरोसिन कालाबाजारी की तलवार

जोधपुर की निलंबित आईएएस निर्मला मीणा की बढ़ी मुश्किलें, 8 करोड़ का गेहूं घोटाला व आय से अधिक संपत्ति के बाद अब तीसरा मामला।
2 min read
May 03, 2018
Rajasthan IAS officer Nirmala meena charged in kerosene black marketing

जोधपुर। राजस्थान में 8 करोड़ रुपये के 35 हजार क्विंटल गेहूं के घोटाले की आरोपित जोधपुर की निलंबित जिला रसद अधिकारी आईएएस निर्मला मीणा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। उनपर आरोप है कि उन्होंने 8 करोड़ रुपए के 35 हजार क्विंटल गेंहूं का घोटाला किया है, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। निर्मला मीणा के फरार होने के बाद राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो उनकी तलाश कर रही है। वहीं एसीबी की एक और तलवार निर्मला मीणा पर लटक रही है। अपने कार्यकाल के दौरान जिस तरह बिना डिमांड अतिरिक्त गेहूं मंगवाकर आठ करोड़ का घपला किया, उसी तरह केरोसिन में कालाबाजारी के खेल का संदेह जताया जा रहा है। रोक के बावजूद केरोसिन मंगवाकर कालाबाजारी की शिकायत मिलने के बाद एसीबी मुख्यालय ने परिवाद दर्ज किया है। जोधपुर सिटी चौकी ने इसकी जांच शुरू कर दी है। ये पड़ताल पूरी होने के बाद ही पूरे घोटाले का खुलासा हो पाएगा।

आपको बता दें कि मीणा के खिलाफ गेहूं घोटाला, आय से अधिक संपत्ति के बाद ये तीसरा प्रकरण है। निर्मला मीणा के फरार होने के बाद राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो उनकी तलाश कर रही है। एसीबी मीणा के तमाम रिश्तेदारों के यहां छापेमारी कर रही है, लेकिन अभी तक उनकी जानकारी नहीं मिल सकी है। उल्लेखनीय है कि निर्मला मीणा जोधपुर में अलग-अलग समय पर 8 साल तक जिला रसद अधिकारी रहीं और इस दौरान आटा मिल मालिकों और राशन डीलरों से मिलीभगत करके फर्जी लोगों के नाम से राशन कार्ड बना दिए और फिर उनके नाम पर गेंहू आवंटित कर दिया, जो आटा मिल मालिकों तक पहुंच गया। इसके बदले मीणा को काफी पैसा मिला बताया। सरकार में पहुंची गड़बड़ी की शिकायत के बाद एसीबी ने जांच अपने हाथ में ली है। इसके अलावा आय से अधिक संपत्ति के मामले की जांच में मीणा और उनके पति के नाम से 17 विभिन्न बैंकों में खाते और 3 लॉकर होने की बात सामने आई है। जानकारी के मीणा के नाम अनुसार जयपुर में दो, जोधपुर में पांच घर, एक पेट्रोल पंप, बीस बीघा जमीन, माउंट आबू में कॉटेज और एक दुकान है जिसके दस्तावेज एसीबी के हाथ लगे है।

दरअसल, जोधपुर के तत्कालीन डीएसओ महावीर सिंह ने सितंबर व अक्टूबर 2015 में मांग नहीं होने के कारण केरोसिन का कोटा शून्य कर दिया था। इसके बाद जनवरी 2016 में जब निर्मला मीणा ने कार्यभार संभाला तब जोधपुर शहर की राशन की दुकानों पर बिना डिमांड ही केरोसिन मंगवाकर इसे बेच दिया गया। इसके लिए राशन डीलरों के फर्जी बिल तैयार किए गए। पहले प्रति राशन कार्ड 4 लीटर और बाद में ढाई लीटर प्रति परिवार केरोसिन दिया जाता था। इनमें बिना एलपीजी वाले उपभोक्ताओं को ही केरोसिन दिया जा रहा था। इसके बाद जुलाई 2017 से नीले केरोसिन की सप्लाई बंद कर दी गई है। शिकायत में पांच थोक विक्रेताओं की मिलीभगत बताई जा रही है। इस मामले में केरोसिन आवंटन के लिपिक तथा एक निरीक्षक की भूमिका भी पूरी तरह संदेह के घेरे में है। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने जोधपुर शहर के रसद कार्यालय से केरोसिन आवंटन का रिकार्ड तलब किया है। इसकी जांच के बाद ही घोटाले से पूरी तरह से पर्दा उठ पाएगा। वहीं आपको बता दें कि मीणा को पकड़ने के लिए टीमें विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर रही है, लेकिन अभी तक कोई सुराग हाथ नहीं लगा हैं।

Published on:
03 May 2018 08:26 am