
अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. कोरोना वायरस मरीजों के सैंपल लेने वाले प्रदेश भर के लैब टेक्निशियन महज 5 सौ रुपए के जोखिम भत्ते को लेकर अपना कार्य कर रहे हैं। जो सीधेतौर पर पांच सौ रुपए में मौत का सौदा है। ये जोखिम भत्ता 2013 तक महज पचास रुपए था, जो बाद में बढ़ाकर पांच सौ रुपए हुआ। इस भत्ते की राशि अभी तक सरकार ने नहीं बढ़ाई। जबकि कोरोना काल के अलावा रूटिन दिनों में भी संक्रमण से लबरेज हरेक बीमारी को लैब टेक्निशियन झेलते हैं।
केन्द्र सरकार देती हैं 41 सौ रुपए
लैब टेक्नीशियनों ने अब तक ढाई लाख सैंपल लिए हैं। जबकि केन्द्र सरकार द्वारा इसी संवर्ग को जोखिम भता 4100 रुपए देय होता है। अधिकांश राज्यों में लेब टैक्नीशियन संवर्ग को 4200 ग्रेड पे दिया जाता है, लेकिन राजस्थान में 2800 ग्रेड पे का पेय मैट्रिक स्लेप देय होता है।
संक्रमण झेलते हैं एलटी
संक्रमण से फैलने वाली गंभीर बीमारियां जैसे स्वाइन फ्लू, एचआइवी, हेपेटाइटिस बी, कोरोना वायरस,टीबी जैसी बीमारीयों से ग्रसित मरीजों के सैम्पल की जांच करने वाले इन कर्मचारियों को संक्रमण की आशंका रहती है।
अब तक एक दर्जन से ज्यादा एलटी की मौत
प्रदेश की सभी प्रयोगशालाओं मे कार्यरत लेब टेक्नीशियन अत्यंत जोखिम भरे वातावरण में कार्य करते है । ऐसे में कार्मिक अनेक गंभीर बीमारीयों से संक्रमित हो जाता है । ऐसे में प्रदेश भर मे एक दर्जन से ज्यादा लेब टेक्नीशियन की मौत आज तक अन्य संक्रमण से हो चुकी है। साथ ही इनके परिवार को भी संक्रमण का भय रहता है।