
जोधपुर. भंवरलाल सुथार द्वारा रचित काव्य कृति कोरोना काळ को मंगलवार को जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो पीसी त्रिवेदी ने लोकार्पण किया।
इस मौके पर प्रो त्रिवेदी ने कहा कि राजस्थानी के दूहा छंद में रचित काव्य-कृति कोरोना काळ मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण है। इसमें परंपरा बोध की भाव-भूमि पर खड़ा कवि सामयिक घटनाओं को शब्दों का लहरिया ही नहीं ओढ़ाता अपितु सामाजिक यर्थाथ से रू-ब-रू भी करवाता है। कवि अपने परिवेश से बतियाता है, खेलता है और उसी से एकमेक होकर लोक-जीवन में अपने रचनाकर्म को निभाता है।
अध्यक्षता कर रहे राजस्थानी के ख्यातनाम कवि-आलोचक डॉ. आईदान सिंह भाटी ने कहा कि कोरोना- काळ काव्य-कृति डिंगल परंपरा के दूहा-छंद में रचित है, जो वर्तमान मानव की मनोदशा को सहज रूप से उजागर करती है। मुख्य वक्ता ख्यातनाम रचनाकार जहुर खां मेहर ने कहा कि कोरोना- काळ काव्य-कृति में गरीब, मजदूर और आम आदमी की पीड़ा को जिस रूप में उजागर किया गया है वो अपने-आप में अद्भूत है। राजस्थानी कवि-आलोचक डॉ. गजेसिंह राजपुरोहित ने इसे वर्तमान समय और समाज की दशा और दिशा को लेकर महत्वपूर्ण कृति बताया। रचनाकार भंवरलाल सुथार ने कोरोना काळ के दौरान अपने सृजन पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। संयोजक सुनील सुथार ने स्वागत उद्बोधन और डॉ. भवानी सिंह पातावत ने आभार व्यक्त किया।