
नंदकिशोर सारस्वत
जोधपुर. संभाग के वनमंडलों की बेशकीमती वनभूमि पर सीमा स्तंभ नहीं होने से अतिक्रमण, खनन और वन अपराधों की लगातार शिकायतों के बावजूद 70 प्रतिशत से अधिक वनसीमाओं का सीमांकन कार्य पूरा नहीं हो पाया है। नतीजन वनभूमि पर असमंजस की स्थिति के चलते वनविभाग के रेंजर वन अपराधियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने से कतराते है। पिछले लंबे अर्से से वन अपराधी इसका लाभ उठाते हुए वनभूमि पर काबिज हो चुके है। प्रदेश के वनमंत्री जोधपुर संभाग के जालोर जिले के सांचौर का प्रतिनिधित्व करते है जहां भी वन सीमांकन कार्य पूरा नहीं हो पाया है। वनबंदोबस्त अधिकारियों की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की वनभूमि के लिए 2 लाख 83 हजार 943 सीमा स्तंभ लगाने की जरूरत गई थी लेकिन कार्य पूरा नहीं हो पाया है।
जोधपुर में तीन हजार सीमा स्तंभ की जरूरत
जोधपुर वनमंडल में 23650 हेक्टेयर वन भूमि के लिए करीब तीन हजार सीमा स्तंभ की जरूरत है लेकिन पिछले लंबे अर्से से वन बंदोबस्त अधिकारी की टीम नहीं होने से सीमांकन और सीमा स्तंभ लगाने का काम अधूरा पड़ा है। यही कारण है की वन भूमि पर 50 से अधिक बस्तियां बस चुकी है।
वन अपराधी उठा रहे फायदा
संभाग के छह जिलो में करीब 644 वनखंड की 356707 हेक्टेयर वन भूमि को सुरक्षित और बचाने के लिए विभाग को करीब एक लाख से अधिक सीमा चिह्न और स्तंभ की जरूरत है लेकिन संभाग के वनक्षेत्रों में कुल दस प्रतिशत सीमा स्तंभ भी पूरी तरह नहीं लग पाए है। सीमा स्तंभ नहीं होने के कारण वन विभाग के फील्डकर्मी अतिक्रमण, पेड़ों की कटाई एवं खनन की शिकायत मिलने पर अव्वल तो मौके पर पहुंचते ही नहीं और पहुंचने पर असमंजस की स्थिति के कारण मामला दर्ज करने और प्रभावी कानूनी कार्रवाई करने से बचते रहते है। इस स्थिति का सीधा फायदा लंबे अर्से से वन अपराधी, खनन और भू माफिया उठा रहे है।