
पीपाड़सिटी (जोधपुर). आपराधिक मामलों में मेडिकल जांच को लेकर चिकित्सा विभाग की ओर से जारी किए गए निर्देश पीड़ितों के साथ पुलिस के लिए भी आफत बन गए हैं।
सरकारी चिकित्सालयों के क्षेत्राधिकार को लेकर की गई नई व्यवस्था के चलते मंगलवार को पुलिस बलात्कार पीडि़ता की मेडिकल जांच को लेकर दर-दर भटकती नजर आई। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस में दर्ज मुकदमों के पीडि़तों की मेडिकल जांच उनके घटनास्थल के क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में ही कराने के आदेश जारी किए हैं। जबकि पहले थाना मुख्यालय के ही सरकारी अस्पताल में दुर्घटना, बलात्कार, लूट, जानलेवा हमले में घायलों का उपचार और मेडिकल रिपोर्ट के लिए एमएलसी मिल जाती थी। लेकिन अब नहीं।
मंगलवार को पुलिस एक बलात्कार पीडि़ता को मेडिकल जांच के लिए शहर के सरकारी अस्पताल लेकर गई तो क्षेत्राधिकार से बाहर का मामला बता कर पल्ला झाड़ लिया।
हालत ये रही कि पुलिस ने जब तिलवासनी सम्पर्क किया तो चिकित्सक नहीं होने की जानकारी देते हुए पीडि़ता को बिलाड़ा ले जाने का कह दिया। इसके बाद उपजिला कलक्टर डॉ. लक्ष्मीनारायण बुनकर की फटकार के बाद शाम को बलात्कार पीड़िता की मेडिकल जांच के लिए तिलवासनी से महिला चिकित्सक को बुलाया गया।
महिला चिकित्सा अधिकारी की कमी
राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कोई भी सरकारी महिला चिकित्सा अधिकारी नहीं हैं।जबकि बलात्कार पीड़िता की जांच नियमों के अनुसार महिला चिकित्सक ही कर सकती हैं।एक लाख की आबादी के अस्पताल में ये पद छह माह से रिक्त है।
इन्होंने कहा
चिकित्सा विभाग के ये निर्देश महिला और बाल अधिकारों के विपरीत हैं। इन्हें तत्काल वापस लेने के लिए आयोग दखल देगा।
-संगीता बेनीवाल, अध्यक्ष राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग,जयपुर
पुलिस में दर्ज मुकदमों की एमएलसी समय पर नहीं होने का नुकसान पीड़ित के साथ पुलिस को उठाना पड़ रहा है। इसमें समय की बबार्दी और प्रक्रिया भी लंबी हो गई है।
-प्रेमदान रतनू, पुलिस थानाधिकारी, पीपाड़सिटी