
गजेंद्र सिंह दहिया/जोधपुर. प्रदेश में उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से 1.05 करोड़ परिवारों को कमल के फूल वाली पर्ची दी जा रही है। वैसे यह भामाशाह योजना का लोगो है, लेकिन यह सतारूढ़ भाजपा के चुनाव चिह्न से मेल खाता है और आचार संहिता लागू होने के बाद भी यही पर्ची उपभोक्ताओं को दी जा रही है। रसद विभाग का कहना है कि राशन वितरण का काम ऑनलाइन है, जिस पर सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग (आइटी) का नियंत्रण है। आइटी विभाग का कहना है कि परीक्षण कर रह हैं कि लोगो हटाएं या नहीं। सरकार ने दिवालीे से पहले खाद्य सुरक्षा योजना में चयनित परिवारों को अक्टूबर से दिसम्बर तक की चीनी और नवम्बर माह का गेहूं और केरोसीन भी आवंटित कर दिया। यह सामग्री प्रदेशभर में उचित मूल्य की 23 हजार 815 दुकानों के माध्यम से चार करोड़ तीस लाख से अधिक लोगों (एक करोड़ 4 लाख 41 हजार 339 परिवारों) को वितरित की जा रही है। यह प्रदेश की अनुमानित जनसंख्या 7.71 करोड़ का 55 फीसदी है। उचित मूल्य की दुकान से राशन लेने के बाद पोस मशीन से ऑटो जनरेटेड पर्ची निकलती है। इसी पर भामाशाह योजना का लोगो कमल का फूल लगा है।
एसएमएस से हटाया भामाशाह, लोगो नहीं
पोस मशीन पर उपभोक्ता के अंगूठा लगाने अथवा उसके दिए मोबाइल नम्बर पर ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) मंगवाकर राशन का वितरण होता है। आचार संहिता से पहले मोबाइल पर एसएमएस के जरिए आने वाले ओटीपी पर भामाशाह लिखा आता था। आचार संहिता लागू होने के बाद ओटीपी से भामाशाह हटा दिया। अब केवल राज एसएमएस लिखा आ रहा है। लेकिन वितरण पर्ची पर कमल के फूल का लोगो नहीं हटाया।
आइटी व चुनाव आयोग को बता दिया
‘राशन वितरण पोस के माध्यम से होता है और पोस पर आइटी का नियंत्रण है। हमनें १६ अक्टूबर को आइटी के साथ चुनाव आयोग को अवगत करा दिया।
मुग्धा सिन्हा, प्रमुख शासन सचिव, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग
परीक्षण कर रहे हैं
‘कमल का फूल भामाशाह योजना का लोगो है। फिर भी हम परीक्षण कर रहे हैं कि इसे हटाएं या नहीं। शीघ्र इसकी जानकारी दे दी जाएगी।
अखिल अरोड़ा, प्रमुख शासन सचिव व आयुक्त, आइटी विभाग
हमें तो जनता को राशन देना है
पोस मशीन की वितरण पर्ची पर कुछ भी छपा हो, हमें तो उपभोक्ताओं को राशन देने से मतलब है। कुछ उपभोक्ताओं ने वितरण पर्ची पर फूल के लोगो को लेकर जरूर आपत्ति की थी।
अशोक बालोटिया, राशन डीलर जोधपुर