
जोधपुर. धार्मिक और स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण आषाढ़ का महीना शुक्रवार से प्रारंभ हो चुका है जो अगले महीने 24 जुलाई को समाप्त होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, आषाढ़ माह में श्री हरि विष्णु और गुरु की उपासना सबसे फलदायी होती है। आषाढ़ में जल देव और ऊर्जा के स्तर को संयमित रखने के लिए सूर्यदेव की उपासना का भी महत्व है। आषाढ़ मास के प्रमुख व्रत-त्योहारों में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा है। इसी महीने देवशयनी एकादशी के दिन से श्री हरि विष्णु शयन के लिए चले जाते हैं जिसके कारण लगातार चार माह तक शुभ कार्यों को टाले जाने का विधान है। इस महीने में ही जैन और वैष्णव चातुर्मास भी प्रारंभ होते है।
ऋ तुओं का संधिकाल भी
आषाढ़ के दौरान सूर्य अपने मित्र ग्रहों की राशि में रहता है। इससे सूर्य का शुभ प्रभाव और बढ़ जाता है। यह महीना धर्म-कर्म के अलावा सेहत के नजरिये से भी बहुत खास होता है। आयुर्वेद के प्रमुख आचार्य चरक और वागभट्ट ने इस महीने को ऋ तुओं का संधिकाल भी कहा है। यानी ये मौसम परिवर्तन का समय होता है। इस दौरान गर्मी खत्म होती है और बारिश की शुरुआत होती है।
खान पान में बदलाव से बचाव
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि आषाढ़ महीने में सूर्य मिथुन राशि में रहता है। इस कारण भी रोगों का संक्रमण बढ़ता है। नमी की वजह से फंगस और इनडाइजेशन की समस्या भी बढ़ जाती है। इसलिए खान-पान पर ध्यान देते हुए छोटे-छोटे बदलाव कर के ही बीमारियों से बचा जा सकता है।नीम, गिलोय, त्रिफला चूर्ण, लौंग, दालचीनी, हल्दी और लहसुन का इस्तेमाल करना चाहिए। खट्टी चीजों से परहेज रखना चाहिए। इस महीने की दोनों एकादशी तिथियों पर भगवान वामन की पूजा के बाद अन्न और जल का दान किया जाता है।