
जोधपुर. पूर्व सांसद गजसिंह ने दस करोड़ से अधिक राजस्थानियों व प्रवासी राजस्थानियों की ओर से बोली जाने वाली राजस्थानी भाषा को मान्यता देने व आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर अनुरोध किया है। पत्र में उन्होंने लिखा की लम्बे समय से चल रही मांग पर निर्णय लेने से प्रदेश व विद्यार्थियों को अपनी भाषा में अध्ययन करने का मौका मिलेगा। राजस्थानी भाषा का सीताराम लालस ने ग्यारह भागों में शब्दकोष लिखा उसे राजस्थानी भाषा साहित्य अकादमी ने पहले ही मान्यता दे रखी है। इससे हिन्दी साहित्य व भाषा को बहुत लाभ हुआ है। कई विश्वविद्यालयों, स्कूलों के पाठ्यक्रम में राजस्थानी भाषा पढ़ाई जाती है। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में लिखा की वर्ष 2003 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधानसभा में राजस्थानी भाषा को मान्यता प्रदान करने का सर्वसम्मत प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा था। उन्होंने केन्द्र सरकार की ओर से घोषित नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सराहना करते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। पूर्व सांसद गजसिंह ने मुख्यमंत्री गहलोत को भी राजस्थानी भाषा को द्वितीय राजभाषा घोषित करने की मांग करते हुए लिखा की केन्द्र की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब पांचवी तक स्थानीय भाषा भी पढ़ाई जा सकेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री को याद दिलाया की पूर्व में भी इस सम्बन्ध में बातचीत करने पर शीघ्र निर्णय लेने का आश्वासन दिया था।