
गजेंद्र दहिया/जोधपुर. सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति के बाद बिग डेटा जनरेशन से हो रही समस्या से निजात दिलाने के लिए हाइब्रिड क्लाउड डाटा सर्विसेज के क्षेत्र में काम करने वाली कम्पनी ‘नेट एप’ ने देश के तीन प्रमुख संस्थानों को फैलोशिप दी है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर, आइआइटी खडग़पुर और भारतीय विज्ञान संस्थान (आइआइएससी) बेंगलूरु मिलकर डेटा स्टोरेज और उसकी सिक्योरिटी के क्षेत्र में कार्य करेंगे। ये संस्थान अधिक से अधिक डेटा को न्यूनतम स्पेस में खपाने और उसे वापस प्राप्त करने की तकनीक विकसित करेंगे। इस शोध पर बौद्धिक अधिकार के लिए कम्पनी दावा नहीं करेगी ताकि यह तकनीक आसानी से और सस्ते दामों पर आम जनता को उपलब्ध हो सके।
सरकारी कामकाज, शिक्षा व चिकित्सकीय कार्य ऑनलाइन होने, वित्तीय सेवाएं मोबाइल पर आने और 4जी तकनीक आने के बाद कम्प्यूटर व मोबाइल पर प्रति क्लिक हजारों जीबी डेटा जनरेट हो रहा है। इस डेटा के स्टोरेज के लिए डिवाइस छोटे पड़ रहे हैं। टेराबाइट में मैमोरी देने के बावजूद उपभोक्ता और अधिक डाटा स्टोरेज की मांग कर रहे हैं। कुछ कम्पनियों ने क्लाउड कम्प्यूटिंग शुरू की है लेकिन उसमें सिक्योरिटी का प्रश्न होने और कुछ क्लाउड कम्यूटिंग सशुल्क होने से यह तकनीक पूरी तरह सफल नहीं हो पाई है। पूरे विश्व में भारी भरकम डेटा को संभालने के लिए जगह की कमी है।
क्या करेंगे तीनों संस्थान
- आइआइटी जोधपुर में कम्प्यूटर साइंस विभाग के प्रो. शुभजीत सिधांता को यह फैलोशिप मिली है। सिधांता फॉग कम्प्यूटिंग के साथ थिंग्स ऑफ इंटरनेट जैसे नए क्षेत्र में काम करेंगे। वे इनकी गुणवत्ता और स्पीड बढ़ाने की तकनीक विकसित करेंगे।
- आइआइटी खडक़पुर के प्रो. बिवास मित्रा स्टोरेज के लिए मशीन लर्निंग बेस्ड मॉडल विकसित करने के साथ ट्रबल शूटिंग पर भी काम करेंगे।
- आइआइएससी के प्रो. विजय कुमार निजी सूचनाओं को तेजी से पुन: प्राप्त करने, क्लाउड कम्प्यूटिंग के क्षेत्र में सिक्योरिटी बढ़ाने और कोडेड कम्प्यूटर तकनीक पर काम करेंगे।
जल्द काम शुरू होगा
‘प्रोजेक्ट आया है लेकिन इसकी पूरी जानकारी नहीं मिली है। प्रोजेक्ट को लेकर काम जल्द शुरू किया जाएगा।
प्रो. सुभाष पाण्डे, पीआरओ, आइआइटी जोधपुर