
जोधपुर। हर साल दीपावली पर सभी अपने घरों की साफ-सफाई और सजावट करने में लगे रहते है, लेकिन अपने मन-दिमाग की नकारात्मकता की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। अगर घर के साथ-साथ मन की भी सफाई हो जाए, तो दीपावली ओर भी अच्छी होगी। घर और मन के साथ पूरी दुनिया रोशन और जगमगाती नजर आएगी। रिमार्केबेल एजुकेशन की ओर से आयोजित वर्चुअल वेबिनार में विशेषज्ञों ने दीपावली के पर्व पर केवल घर ही नहीं बल्कि अपने मन व दिमाग की साफ-सफाई भी धन की लक्ष्मी के साथ ज्ञान की लक्ष्मी के लिए बहुत जरूरी बताया।
मन को खूबसूरत बनाना होगा
वेबिनार को सम्बोधित करते हुए रिमार्केबल एजुकेशन की फाउंडर व सीईओ डॉ प्राची गौड़ ने कहा कि घर की तरह क्यों न मन को भी खूबसूरत बनाया जाए। मन के द्वार व खिड़कियों पर आत्मविश्वास का रंग-रोगन कर पूरी दुनिया में उसकी रोशनी को बिखेरा जाए। उन्होंने कहा कि अशांत से मन को कुछ राहत पहुंचाने के लिए नियमित ध्यान के जल से मन में पोंछा लगाने की जरूरत है, जिससे मन के फर्श पर अशांति के दाग-धब्बे मिटते नजर आएंगे।
स्वच्छता और शुद्धता का प्रवाह करना होगा
प्रबंध संचालक व क्लिनिक साइकोलॉजिस्ट डॉ श्वेता पारीक ने वेबिनार को सम्बोधित करते हुए कहा कि घर की सफाई के साथ-साथ अपने मन को व अपने विचारों को भी साफ करें और उनमें स्वच्छता और शुद्धता का प्रवाह करें। अपने पुराने अनुपयोगी विचारों को मस्तिष्क से बाहर निकाल कर नए उर्जावान और सकारात्मक विचारों का चिंतन कर अपने मन को सजाएं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि बाहरी स्वच्छता ही नहीं आंतरिक स्वच्छता भी महात्वपूर्ण है। हमारे मन की स्थिति भी सामान जैसी ही रहती है।
मीठे वचनों की स्वादिष्ट सौगात
छात्र परामर्शदाता हर्षिता शर्मा ने कहा कि मन में मीठे वचनों की मिठाई बनाई जानी चाहिए। जिससे हर मिलने वाले को इन मीठे वचनों की स्वादिष्ट सौगातें मिल सकें और हर रिश्ते में मिठास घुल सकें। हमारे मन में कभी खुशियां मेहरबानी बनकर आती हैं, तो कभी दु:ख आकस्मिक बनकर। जिस तरह खुशियां हमें प्यारी लगती हैं, उसी तरह दु:ख भी हमें बहुत कुछ सिखाकर ही जाते हैं। इसलिए हमें इनका समान रूप से स्वागत करना चाहिए।
नकारात्मक विचार को बाहर निकालें
पीयूष पंडित सह संस्थापक आईआईयू ने कहा कि दीपावली पर घर की सफाई के साथ कुछ समय अपने लिए भी निकालें और अपने मन से नकारात्मक विचार को बाहर निकालने के साथ सकारात्मक विचार को ग्रहण करने का प्रयास करें। जिस तरह दीपावली पर साफ की हुई धूल कुछ दिनों बाद फिर से जमना शुरू हो जाती है, लेकिन उस समय उसे साफ करने में अधिक मेहनत नहीं लगती।