जोधपुर

लॉक डाउन में रिटायर्ड फौजी ने मजदूर का 14 बार कराया डायलेसिस, अधिकारियों ने नहीं उपलब्ध करवाई एम्बुलेंस

आर्मी से सेवानिवृत्त अमर सिंह भाटी (74) ने स्वयं किराए की गाड़ी करके हीरा देवी को गांव से जोधपुर डायलिसिस के लिए भेजा। गत 27 मार्च से लेकर 17 मई तक उन्होंने 14 बार हीरा देवी को डायलिसिस के लिए भेजा है। निजी वाहन चालक एक ट्रिप का करीब 2200 रुपए लेता है। अब तक अमर सिंह के 31 हजार 100 खर्च हो चुके हैं।
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retire soldier helped poor woman for her dialysis in corona lockdown
लॉक डाउन में रिटायर्ड फौजी ने मजदूर का 14 बार कराया डायलेसिस, अधिकारियों ने नहीं उपलब्ध करवाई एम्बुलेंस

गजेन्द्र सिंह दहिया/जोधपुर. शहर से 90 किलोमीटर दूर ओसियां तहसील के किंजरी गांव की कमठा मजदूर हीरा देवी (45) की दोनों किडनियां 5 साल से खराब हैं। वह सप्ताह में दो बार डायलिसिस कराने के लिए जोधपुर आती थी, लेकिन लॉक डाउन के दौरान सार्वजनिक परिवहन बंद हो गया। किराए की गाड़ी के पैसे नहीं थे और सरकारी अधिकारियों द्वारा 108 एम्बुलेंस के लिए मना कर दिया गया।

पति पांचाराम मेघवाल भी इतना ही कमाता था कि परिवार का पेट पाल सके। पैसों के अभाव में वह भी अपनी पत्नी को तिल-तिल कर मरने को देखने के लिए मजबूर था। ऐसी स्थिति में देश की सरहद की सुरक्षा करने वाले एक रिटायर्ड फौजी ने हीरा देवी व उसके परिवार की भी रक्षा की।

इसी गांव के रहने वाले आर्मी से सेवानिवृत्त अमर सिंह भाटी (74) ने स्वयं किराए की गाड़ी करके हीरा देवी को गांव से जोधपुर डायलिसिस के लिए भेजा। गत 27 मार्च से लेकर 17 मई तक उन्होंने 14 बार हीरा देवी को डायलिसिस के लिए भेजा है। निजी वाहन चालक एक ट्रिप का करीब 2200 रुपए लेता है। अब तक अमर सिंह के 31 हजार 100 खर्च हो चुके हैं।

लॉक डाउन से पहले बस से आते थे
हीरा देवी बीपीएल श्रेणी से है। इसके चलते जोधपुर स्थित कमला नगर अस्पताल में उनका डायलिसिस नि:शुल्क होता है। लॉक डाउन से पहले दंपति बस से जोधपुर आते थे जिसमें उनका 250 से 300 रुपए ही खर्च होता था।

मंत्री, आईएएस, आरएएस, डॉक्टर सबने आश्वासन ही दिया
मैंने सीएमएचओ डॉ बलवंत मंडा, एडीएम एमएल नेहरा, प्रभारी सचिव नवीन महाजन से लेकर प्रभारी मंत्री लालचंद कटारिया को मामले से अवगत कराया लेकिन सभी ने आश्वासन ही दिया। यह जरूर है कि कटारिया के कहने पर एक कांग्रेसी कार्यकर्ता ने ओसियां एसडीएम रतन लाल रैगर से पास की व्यवस्था करवा दी। मैंने यह सोचकर इलाज कराया कि चलो एक महीने की पेंशन नहीं आई सही।
- अमर सिंह भाटी, रिटायर्ड फौजी

Published on:
20 May 2020 09:03 am