
गजसिंहपुरा (जोधपुर) . बढ़ते डीजल-पेट्रोल के दाम ने वाहन चालकों व किसानों की कमर ही तोड़ दी है। राम और राज के आगे बेबस किसान अपनी किस्मत को कोस रहे हैं।
बैंक और साहूकारों के कर्ज के बोझ तले दबे किसानों के लिए इतने महंगे डीजल से जुताई और सिंचाई करना आसान नहीं रही। पेट्रोल के दाम आसमान छूने से बाइक पर रोजाना घास का गट्ठर लाने वाले किसान अब सिर पर बोझा ढोते नजर आ रहे हैं। वहीं ट्रैक्टर पर बैठकर खेत में जाने वाला किसान का परिवार धूप में पैदल आवाजाही करने लगा है।
यही नहीं इस बार कई किसानों ने रबी फसल बुवाई से पहले 4 बार जुताई करवाने के बजाय दो बाहरी करवाई। इससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है। किसानों ने बताया कि डीजल के भाव आसमान छूने से ट्रैक्टर का भाड़ा महंगा हो गया।
पहले जुताई बुझाई और चारा घर लाने का किराया अनाज मंडी में बेच कर देते थे, लेकिन इस बार खरीफ फसल बर्बाद होने से बुवाई का भाड़ा चुकाना मुश्किल है। ऐसे में पिछला भाड़ा नहीं चुकाने से रबी फसल जुताई के लिए ट्रैक्टर वाले नहीं आ रहे।
इन्होंने कहा
डीजल -पेट्रोल के दाम बढऩे के साथ रसोई गैस, खाद बीज की कीमतें आसमान छूने लगी है। फसल बर्बाद होने से किसान कर्ज तले दब गया।
बाबूलाल देवड़ा, किसान गजसिंहपुरा
डीजल के दाम बढऩे से जुताई और बुवाई भी महंगी हो गई। गरीब व मध्यम वर्ग के किसानों के लिए यह समस्या किसी चुनौती से कम नहीं है।
सुरेंद्रसिंह बेड़ा, सरपंच ग्राम पंचायत गजसिंहपुरा
तीन दशक पहले बैल व ऊंट से जुताई करते थे, तब खर्चा कम होता था। आज जुताई, बुझाई, अनाज को लाने के अलावा कटाई और निनाण निकलाई सब काम मशीनों से होने लगा। इस कारण बचत न के बराबर होने लगी है। ऊपर से सरकार ने डीजल के दाम बढ़ाकर कमर तोड़ दी।
रामलाल सैनी, किसान