
जोधपुर
अगर आपको शहर में रहते हुए गांव जैसे या यूं कहें गांवों से भी बदतर हालात देखने हो तो बनाड़ रोड चल आइए। यहां आकर पता चलेगा कि सड़कों के नाम पर किस तरह सरकार के कीमती खजाने को चूना लगाया जा रहा है और बार-बार सड़क बनाने और उखड़ने के बाद फिर बनाने का खेल बड़े आराम से चल रहा है। बनाड़ मार्ग अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। भले ही शहर में करीब ग्यारह दिन से बारिश नहीं हुई हो लेकिन गणेश होटल से लेकर नांदड़ी तक सड़कें पानी से लबालब है और समन्दर की तरह हिलोरें लेती नजर आएगी। गणेश होटल से लेकर नांद़ड़ी तक पूरा सड़क मार्ग तालाब बना हुआ है। मदेरणा कॉलोनी से लेकर बीजेएस तक का सीवरेज की गन्दगी से लोगों का जीना दूभर हो गया है।
बनाड़ रोड की उबड़-खाबड़ रोड और जलभराव की समस्याओं को लेकर स्थानीय लोगों ने दर्जनों बार धरना-प्रदर्शन और रास्ता रोकने जैसे कार्यक्रम किए। हाल ही, जोधपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी कहा कि अधिकारियों को जोधपुर में रहना है, तो सड़क तो सही रखनी ही होगी लेकिन मुख्यमंत्री गहलोत के दौरे के बाद भी अधिकारियों पर कोई असर नहीं हो रहा है।
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10 साल सेना की आपत्ति से अटका रहा
आरटीओ नाले को जोजरी नदी से जोड़ने की योजना है। यह नाला 8 किमी लंबा है। फिलहाल 4.01 किमी ही पक्का है। पहले नाला सेना की जमीन से निकालना था। सेना की 1800 मीटर व निजी खातेदारों की 1 बीघा 13 बिस्वा जमीन अवाप्त करनी थी। प्रपोजल बनाया, तब 20 करोड़ लागत आंकी गई थी, लेकिन सेना की जमीन के बारे में फैसला नहीं होने से यह प्रपोजल आगे नहीं बढ़ पाया। हालांकि इसके लिए अमृत योजना से कुछ राशि भी मिली थी। दस साल तक यह मामला लटका रहा।
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नाला रेलवे ट्रेक के साथ, राजमार्ग के साथ चलेगा
राज्य सरकार आरटीओ नाले की निकासी का प्लान मंजूर कर बजट घोषणा कर चुकी है, लेकिन कुछ तकनीकी अड़चनों के कारण काम लंबित है। यह नाला गणेश होटल से शुरू होकर रेलवे ट्रेक के साथ-साथ सारण नगर पुलिया के नीचे से होकर जोजरी से जोड़ना था, लेकिन अब यह नाला राजमार्ग पर दुकानाें के आगे बनेगा। नाला 10-12 फीट गहरा बनेगा। ढलान अच्छी होने से नाला बनने के बाद पानी नहीं रुकेगा, जिससे जलभराव की स्थिति नहीं बनेगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह नाला कब बनेगा।
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क्षेत्रवासियों का कहना है--
शहर की मुख्य सड़कें बारिश में इतनी खराब नहीं होती जितनी बनाड़ रोड हो रही है। सवाल यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग को एक साल में तीन बार क्यों बनाना पड़ रहा है। बजट कहां जाता है। अब आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
राजबहादुरसिंह, अध्यक्ष
नांदड़ी विकास समिति
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मदेरणा कॉलोनी से लेकर बीजेएस तक का पानी बनाड़ रोड पर भरता है। अगर समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों ने पानी निकासी का समाधान नहीं निकाला तो इस सड़क पर किसी की भी जान जा सकती है।
मंगाराम कालीराणा
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सड़क का क्या हाल है इसका अंदाजा इसी बात से लगा लीजिए कि हमने रास्ता ही बदल लिया। माता का थान होकर आना पड़ता है। प्रशासन को लोगों की पीड़ा को समझना चाहिए।
माणकराम चौधरी
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अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगा चुके हैं। कुछ भी नहीं हो रहा है। अगर यही हाल रहा तो कौन बसना चाहेगा बनाड़ रोड पर। पांच सितम्बर को बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। फिर भी कार्रवाई नहीं हुई तो आगे की रणनीति तय करेंगे।
पूनमचंद विश्नोई
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