
जोधपुर. भारतीय वायुसेना और फ्रांस की एयर एंड स्पेस फोर्स के मध्य जोधपुर वायुसेना स्टेशन पर चल रहे पांच दिवसीय युद्धाभ्यास डेजर्ट नाइट-२१ का रविवार को अंतिम दिन है। रविवार शाम को फ्रांस के 175 से अधिक सदस्यों की टीम अपने देश लौट जाएगी।
रफाल उड़ाने वाले फ्रांस पायलट्स को जोधपुर में सुखोई-३० की स्क्वाडर्न के पायलट्स से भी काफी कुछ सीखने को मिला। फ्रैंच पायलट्स ने सुखोई की कॉकपिट में उड़ान भर रुसी टेक्नोलॉजी को भी समझा जो रफाल की यूरोपियन टेक्नोलॉजी से थोड़ी अलग है। एेसे में सुखोई के इलेक्ट्रोनिक्स, सेंसर और हवा में स्ट्रेटजी से कई बातें रफाल उड़ाने वाले फ्रैंच पायलट्स को सीखने में मदद मिली। उधर भारतीय रफाल पायलट्स ने भी फ्रैंच रफाल पायलट्स से भारतीय आसमां में युद्ध कौशल की कई स्ट्रेटजी सीखी। भारतीय वायुसेना में शामिल होने के बाद भारतीय रफाल विमानों का पहला युद्धाभ्यास है।
युद्धाभ्यास में फ्रांस अपने साथ चार रफाल लड़ाकू विमान, एक एअरबस टैंकर ए-३३० आरटीटी और एक ट्रांसपोर्ट लेकर आया था जो रविवार को जिबूती जाएंगे। जिबूती में फ्रांस की एयरफोर्स अपने स्काइरॉस आयोजन के तहत तैनात है जो विभिन्न देशों के साथ युद्धाभ्यास कर रही है।
फ्रैंच पायलट बोले- रफाल उड़ाना आसान
भारतीय पायलट के साथ भारतीय रफाल और सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के साथ युद्धाभ्यास में तालमेल बेहतरीन रहा। रफाल अच्छा विमान है। इसे उड़ाना ज्यादा मुश्किल नहीं है। भारतीय पायलट ने भी जल्द ही ऑपरेशनल स्ट्रेटजी समझ कर बेहतरीन प्रदर्शन किया।
- लेफ्टिनेंट कर्नल जैक, फ्रैंच एयरफोर्स
भारतीय वायुसेना के पायलट बोले
हमें रफाल पर अच्छी ट्रेनिंग मिली है जिसके कारण जल्द ही इसे ऑपरेशनलाइज कर लिया गया है। हमने फ्रांस के पायलट से कुछ सीखा है तो उन्होंने भी हमसे कुछ सीखा है।
- सार्थक कुमार, भारतीय रफाल पायलट
‘फ्रांसीसी वायुसेना के पायलट और हमने साथ-साथ एक दूसरे के साथ की कॉकपिट को शेयर किया। युद्ध अभ्यास में 2 सीटर लड़ाकू विमान काम में लिए गए। फ्रैंच पायलट ने सुखोई के कॉकपिट में बैठकर उसकी स्टेट्रटजी भी देखी और वे प्रभावित भी हुए। दोनों को ही एक दूसरे से कुछ सीखने को मिला है।
- फ्लाइट लेफ्टिनेंट धीरज सुखोई-30 पायलट