जोधपुर

पलायन कर रहे मजदूरों की भूख मिटाने के लिए दो बहनों का सत्तू इनोवेशन

- दो बहनों ने श्रमिकों के लिए चलाया अनूठा अभियान - यूनाइटेड नेशंस ने भी सराहा  
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Jun 18, 2020
पलायन कर रहे मजदूरों की भूख मिटाने के लिए दो बहनों का सत्तू इनोवेशन
पलायन कर रहे मजदूरों की भूख मिटाने के लिए दो बहनों का सत्तू इनोवेशन

जोधपुर.
कोविड-19 के लॉकडान में जब श्रमिकों का पलायन हुआ तो सडक़ों पर भूख-लाचारी की तस्वीरें सामने आई। ऐसे समय में दो बहनों के एक इनोवेटिव आइडिया ने इन श्रमिकों की बहुत मदद की। इसे यूनाइटेड नेशंस ने भी सराहा।

दिल्ली-गाजियाबाद नेशनल हाइवे 24 से कुछ ही मील दूर महक आनंद और उनकी छोटी बहन डॉ. नेहुल सक्सेना का घर है। ये दोनों बहने जोधपुर निवासी महिला चिकित्सक डॉ. गुंजन रानी सक्सेना और पैथोलोजिस्ट स्वर्गीय डॉ सुबोध कुमार सक्सेना की बेटियां हैं। महक और नेहुल ने इन गरीब परिवारों का कूच देखा और कुछ करने की ठानी। पहले इनके लिए जूते-चप्पल, टोपी व अन्य सामग्री जुटाई। इससे संतुष्ट नहीं हुई तो सोशल मीडिया पर फंड जुटाकर मिल्क पाउडर, सेरेलेक, ग्लूकोस बिस्किट्स व अन्य सामग्री खरीदी। हाइवे पकी सामग्री वितरण के खराब होने की शिकातयें मिलने लगी तो दोनों बहनों ने बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों का प्राचीन मूल व्यंजन सत्तू उपयोग करने की ठानी।
सत्तू के फायदे

सत्तू को आराम से 6 महीने तक रखा जा सकता और इसे नमकीन या मीठे पेय के रूप में उपयोग करते हैं। महक और नेहुल को सत्तू के रूप में एक रामबाण नुस्खा मिल गया। अपने परिवार व दोस्तों से 48 घंटों में 2 लाख से अधिक राशि जुटाई और 5 हजार से ज्यादा श्रमिकों को सत्तू-सेतु किट वितररित किए। इसमें 250 ग्राम सत्तू, 100 ग्राम चीनी, 50 ग्राम नमक, दो नींबू और 1 लीटर पानी की बोतल दी गई।
अब दूसरे चरण की तैयारी

सत्तू-सेतु अभियान को विश्वदीप ट्रस्ट, इंडिविजुअल फिलॉन्थ्रोफिस्ट अनुभा प्रसाद जो यूनाइटेड नेशंस की भारत में नेशनल कोऑर्डिनेटर से भी सहयोग मिला। अब दोनों बहनें इसके दूसरे चरण की तैयारी कर रही है।

Updated on:
18 Jun 2020 09:30 pm
Published on:
18 Jun 2020 09:30 pm