
जोधपुर. जोधपुर का वातावरण अभी कोरोना मुक्त जैसा लग रहा है, लेकिन ऐसा सोचना नादानी साबित हो सकता है। कोरोना जैसी महामारी कब और किस म्यूटेंट में आ जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता। जोधपुर के सरकारी व निजी स्कूलों में शत-प्रतिशत बच्चे बुलाए जाना शुरू हो चुके है। स्कूलों में बच्चे टिफिन तक शेअर कर रहे हैं। ऐसे में स्पष्ट हैं कि कोरोना अगर आता है तो स्कूल से बच्चों के जरिए घर में भी आएगा।
शहर के कई पैरेंट्स डिमांड कर रहे हैं कि स्कूलों को ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन का विकल्प पुन: शुरू कर देना चाहिए। हालांकि शहर के कई स्कूल ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं, लेकिन नामी स्कूलों ने तो ऑनलाइन पढ़ाई से दूरी बना ली है। समय से पहले शहर में सर्दी का माहौल भी पैरेंट्स के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। छोटे बच्चे सुबह 8 बजे से पहले ऑटो-बसों सहित अन्य बालवाहिनियों के माध्यम से स्कूल जा रहे हैं। कई बच्चों को सर्दी-जुकाम तक होना शुरू हो गए हैं। पैरेंट्स को भय सता रहा है कि जिस तरह जयपुर में कोरोना केस आ रहे हैं और स्कूली बच्चे चपेट में आए हैं, ऐसे हाल जोधपुर में न हो जाएं।
बच्चों को टीका लगाकर ही खोले स्कूल
स्कूल ऑफलाइन खोलने का निर्णय जल्दबाजी भरा है। बच्चों की वैक्सीन अब आएगी, एक बार मान लें कि बच्चों की जान को खतरा नहीं है, लेकिन वायरस कहीं न कहीं उनके शरीर के दूसरे अंगों को प्रभावित कर सकता है। बच्चों को टीका लगाने के बाद ही स्कूल खोली जाने चाहिए। दूसरा स्कूलों को ऑफलाइन व ऑनलाइन दोनों पढ़ाई के विकल्प देने चाहिए। स्कूल तो केवल अब ऑफलाइन पढ़ा रहे है।
- श्रीकांत लोढ़ा, अभिभावक
अभी क्लासेज ऑनलाइन चलने चाहिए
कोरोना के चलते डेढ़ साल से स्कूल पर ताला लगा था, पढ़ाई का नुकसान ज्यादा न हो, इसीलिए ऑनलाइन कक्षा की मुहिम चलाई गई थी। बिना टीकाकरण के बच्चों को स्कूल भेजना बिलकुल सही नहीं है। क्योंकि कोरोना खत्म नहीं हुआ है, वयस्कों के टीके लग रहे है, लेकिन बच्चों के टीके नहीं लग रहे हैं। बच्चों के टीकाकरण न होने तक ऑनलाइन क्लासेज ही चलनी चाहिए।
- निकिता पटवा, अभिभावक