
अविनाश केवलिया/जोधपुर. शहर की पावटा फल-सब्जी मंडी को भदवासिया शिफ्ट करने के लिए चल रही विभागीय प्रक्रिया में छोटे दुकानदारों के लिए अब तक कोई नीति ही नहीं थी। एक शिकायत पर सीएम प्रकोष्ठ से मांगी गई प्रकरण की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। अब मंडी बोर्ड की बैठक में नीति निर्धारण की बात कही गई है।
करीब पांच साल पहले शुरू हुई मंडी शिफ्टिंग और बस स्टैंड विस्तार की प्रक्रिया उदासीनता का शिकार है। बड़े दुकानदारों के लिए तो 323 दुकानों की जमीन आवंटित हो गई और करीब 50 प्रतिशत तक निर्माण भी हो गया है। लेकिन करीब सात सौ छोटे व फुटकर व्यापारियों भदवासिया में जमीन देने के लिए कागजी कार्रवाई तो शुरू हुई, लेकिन कोई नीति नहीं बनाई गई। जबकि इनको में रोडवेज की जमीन को इनके लिए चिह्नित किया गया था। इसके बदले रोडवेज को नागौर रोड पर जमीन भी दी गई है। लेकिन जब तक पावटा मंडी से यह छोटे व्यापारी शिफ्ट नहीं होते तब तक इस पूरे प्रोजेक्ट को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सकता।
ऐसे समझिये पूरा प्रोजेक्ट
- राइकाबाग बस स्टैंड विस्तार के लिए पावटा फल सब्जी मंडी की 17 बीघा जमीन ली जानी है।
- पावटा मंडी के बड़े दुकानदारों को भदवासियों दुकानें आवंटित हो गई लेकिन नीति के अभाव में छोटे व्यापारी स्थानांतरित नहीं हो सके।
- भदवासिया में रोडवेज की 27 बीघा जमीन इन व्यापारियों को आवंटन के लिए चिह्नित है।
- रोडवेज भदवासिया में जो जमीन दे रहा है उसके बदले उसको नागौर रोड पर 17 बीघा जमीन दी जा रही है।
- छोटे दुकानदारों को पावटा मंडी से शिफ्ट नहीं किया जाता तब तक यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सकता।
इसलिए जरूरी है नीति
छोटे व्यापारियों की संख्या अधिक है। इनको कितनी जमीन आवंटित होगी और जिस संगठन से जुड़े लोगों को होगी इस पर एक नीति बनाकर राज्य सरकार को भिजवानी है। इसके बाद जमीन हस्तांतरण व अन्य प्रक्रिया को अपनाया जाएगा।
इनका कहना है...
‘नीति निर्धारण के लिए 14 फरवरी को बुलाई बोर्ड की बैठक स्थगित करनी पड़ी। अब जल्द अगली बैठक में इसका निर्धारण करेंगे।
- भागीरथ प्रजापत, सचिव, सावित्री बाई फुले कृषि उपज मंडी समिति (फल सब्जी) जोधपुर