प्रदेश में पद्मावत फिल्म लोग भले नहीं देख पाएंगे, लेकिन हाईकोर्ट को यह फिल्म दिखानी ही होगी और वह भी 23 जनवरी से पहले।
जोधपुर। प्रदेश में पद्मावत फिल्म लोग भले नहीं देख पाएंगे, लेकिन हाईकोर्ट को यह फिल्म दिखानी ही होगी और वह भी 23 जनवरी से पहले। हाईकोर्ट ने फिल्म निर्माण के दौरान डीडवाना में दर्ज एफआईआर पर निर्णय करने से पहले फिल्म दिखाने का निर्देश दिया है।
न्यायाधीश संदीप मेहता ने निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली ने फिल्म निर्माण के दौरान डीडवाना में दर्ज एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका पर यह आदेश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में लगाए आरोपों की सच्चाई फिल्म देखने के बाद ही पता लग सकते के बारे में पता चल सकता है, इसलिए फिल्म को दिखाने की व्यवस्था की जाए।
इस पर भंसाली के अधिवक्ता निशांत बोड़ा ने कहा कि याचिकाकर्ता से पूछ कर ही इस बारे में जवाब दिया जा सकता। कोर्ट ने इस पर मामले की सुनवाई 23 जनवरी तय की है और निर्माता निर्देशक को 23 जनवरी से पहले फिल्म कोर्ट को दिखानी होगी।
इससे पहले सरकार की ओर से पैरवी करते हुए जेपी भारद्वाज ने कहा कि फिल्म विवादों मे है। ऐसे में पुलिस को अनुसंधान करने दिया जाए, एफआईआर निरस्त नहीं की जाए। इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता बोडा ने कहा कि ना तो फिल्म को अभी प्रदर्शित किया है और ना ही ट्रेलर जारी हुआ है।
ऐसे में हाईकोर्ट ने कहा कि फिल्म पहले कोर्ट मे दिखाई जाए। अधिवक्ता बोडा ने इसके लिए समय चाहा और कहा कि निर्माता निर्देशक से पूछ कर बताएंगे कि फिल्म कब तक कोर्ट में प्रदर्शित की जाए। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को 23 जनवरी तक समय देते सुनवाई को मुलतवी कर दिया।
यह था मामला
डीडवाना में फिल्म पदमावती की शूटिंग के दौरान डीडवाना में पिछले वर्ष मार्च में वीरेंद्र सिंह व नागपाल ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि लगता है फिल्म में पदमावती का ठीक से चरित्र चित्रण नहीं किया है, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।
एफआईआर में भंसाली के साथ ही अभिनेत्री दीपिका पादुकोण व अभिनेता रणवीरसिंह के भी नाम शामिल थे। इस पर भंसाली व अन्य की ओर से एफआईआर रद्द करवाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।