जोधपुर

‘उड़ता पंजाब’ नहीं साहब, अब ‘उड़ता जोधपुर’ कहिए

स्मैक पर चल रहे पत्रिका अभियान के मद्देनजर युवाओं ने बनाई नशे के दुष्प्रभाव रोकने पर सामाजिक शॉर्ट मूवी धुंध द फॉग
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Feb 12, 2020
‘उड़ता पंजाब’ नहीं साहब, अब ‘उड़ता जोधपुर’ कहिए
‘उड़ता पंजाब’ नहीं साहब, अब ‘उड़ता जोधपुर’ कहिए

जोधपुर. एक था रणवीर। जो शहर में सिर्फ और सिर्फ धावक बनने के सपने संजोए आता है। उसे क्या पता होता है कि यहां स्मैक के नशे के दलदल में घुसाने के लिए जालसाज दोस्त हैं। जालसाज दोस्तों की बदौलत रणवीर उस समय धावक की रेस से बाहर होकर रणछोड़ बन जाता है, जिस दिन उसका नामकरण नशे की दुनिया में आरवी पड़ जाता है। धीरे-धीरे पैसे की खपत होने पर आरवी जोधपुर शहर के अनेक स्थानों पर चैन स्नैचिंग की वारदातों को अंजाम देता है। एक के बाद एक घटनाएं आरवी को नशेड़ी के साथ गुनाहगार बना देती है। परिजनों के प्रयास के बाद इस नशे के दलदल से बाहर निकलने के लिए आरवी को सौ हड्डियां टूटने जैसा दर्द झेलना पड़ता है। आखिर नशे के दलदल से बाहर निकलने वाला रणछोड़ आगे जाकर रणजीत बनता है। अब आज का रणजीत पुन: अपने रणवीर के रूप में आ चुका है। ये कहानी है शहर में स्मैक के नशे में पड़ चुके युवाओं की। जिन्हें जीवंत किया जोधपुर शहर में स्मैक नशे के आदि हो रहे युवाओं पर रूद्राक्ष टीम की ओर से बनाई गई ‘धुंध द’ फॉग फिल्म ने।

राजस्थान पत्रिका की खबरों से प्रेरित होकर किरदारों ने स्मैक के नशे में धंस रहे युवाओं की पीड़ा बयां की। साथ ये भी बताया कि स्मैक से आदी युवक नफरत नहीं बल्कि सुधार और प्यार की थैरेपी की दरकार से जूझ रहे हैं। नशे में फंसे युवाओं को बाहर निकालना मुश्किल नहीं है, लेकिन इसको परिजनों को सिर्फ अपने मरीज को सपोर्ट करने की जरूरत है। इस फिल्म के डायरेक्टर हसमुख दाधीच, कहानीकार गोपाल जोशी, गीतकार डॉ. रोबिन पुरोहित व संगीतकार दसवीं के छात्र अनुज पुरोहित रहे। इस फिल्म के मुख्य किरदार राजेश व्यास, विशाल पुरोहित, हेमंत भारद्धाज, धैर्य जोशी, गौरव जोशी, पंकज मूथा, जितेन्द्र व्यास, अमित बोहरा, आदित्य जोशी समेत अन्य का रहा। टीम रूद्राक्ष की ओर से रक्तदान, पौधरोपण व पार्क की सफाई जैसे कार्य भी शहर में करवाए जाते हैं।

पत्रिका की खबरों से मिली प्रेरणा

फिल्म के संगीतकार डॉ. रोबिन पुरोहित व अभिनेता राजेश व्यास ने बताया कि ‘राजस्थान पत्रिका’ में लगातार युवाओं के स्मैक की लत में पडऩे के समाचार प्रकाशित हो रहे थे, इसके बाद फिल्म बनाने का निर्णय हुआ। इस फिल्म में बाकायदा मनोचिकित्सक की ओर से नशे की लत और उसके दुष्प्रभावों को बताने के सीन में पत्रिका में प्रकाशित समाचारों की इपीएस भी दिखाई गई। फिल्म में पत्रिका साभार तक जताया गया।

Published on:
12 Feb 2020 11:00 pm