
जोधपुर।
भारतीय लोगों को अक्सर बाजार से कपड़े खरीदकर लाने के बाद भी उनकी शरीर की फिटिंग के अनुसार कपड़े नहीं मिलते है लेकिन अब जल्द ही उनकी कद-काठी के हिसाब से कपड़े की भारतीय साइज मिलेगी। केन्द्रीय वस्त्र मंत्रालय की ओर से 'साइज इंडियाÓ परियोजना लांच की जाएगी। इस परियोजना को लाने से पहले कपड़ों के स्टैण्डर्ड नाप के लिए अध्ययन किया जा रहा है।
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भारत के पास नहीं एक्सएल
ब्रिटेन, अमरीका और यूरोप के पास अपने-अपने नाप है लेकिन भारत के पास इन देशों में प्रचलित कपड़े के नाप 42, 44, स्माल, मीडियम, लार्ज, एक्स्ट्रा लार्ज, एक्सएल, डबल एक्सएल जैसा कोई स्टैण्डर्ड नाप नहीं है। यहां इन्हीं देशों के नाप का उपयोग किया जा रहा है। जो अक्सर भारतीय लोगों के शरीर की रचना के अनुसार फिट नहीं होते है और उन्हें अल्ट्रेशन कराना पड़ता है। देश में आज भी कई लोग अपने नाप के अनुसार कपड़े नहीं मिल पाते है।
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डेटाबेस तैयार होगा
देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में लोगों की शारीरिक संरचना में अंतर है। इसको ध्यान में रखते हुए केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय की ओर से जल्द ही १५ से ६५ आयु वर्ष के करीब २५ हजार लोगों (महिला-पुरुष) के शरीर के माप के अनुसार ३ डी सांख्यिकीय सर्वे किया जाएगा। इनके आधार पर माप का डेटाबेस तैयार होगा और स्टैण्डर्ड मानकीकृत आकार चार्ट तैयार होगा। इन स्टैण्डर्ड माप के आधार पर रेडी टू वियर उद्योग और सभी भारतीय ब्रांडों के मानक मानक बिंदु व्यक्ति के लिए समान आकार के होंगे
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सरकार कपड़ा उद्योग में तकनीक को दे रही बढ़ावा
केंद्र सरकार ने कपड़ा उद्योग में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए गुजरात को पिछले साढे चार साल में 1800 करोड़ रुपए आवंटित किए। इस आवंटन के बाद गुजरात के कपड़ा 30 हजार करोड़ रुपए का नया निवेश आया।
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केन्द्रीय वस्त्र मंत्रालय की यह अच्छी परियोजना है। जोधपुर रंगाइ-छपाई में देश में उभरता बाजार है और यहां से पूरे देश में बड़ी मात्रा में सप्लाई होता है। सरकार अगर प्रमोट करे तो फेब्रिक और मैन्यूफेक्चरिंग इकाइयां लग सकती है और पूरा रंगाइ, छपाई व रेडिमेड कपड़े के बड़ा मार्केट बन सकता है।
मनोहर खत्री, एक्जीक्यूटिव मेम्बर
जोधपुर टैक्सटाइल एसोसिएशन
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