
बिलाड़ा (जोधपुर). भूगोलवेत्ता डॉ. नरपतसिंह राठौड़ की तैयार की गई प्रस्तावित घग्घर-यमुना-जोजरी-लूनी-साबरमती नदी संगम परियोजना को सरकार व्यावहारिक रूप दे तो हर दूसरे-तीसरे वर्ष पडऩे वाले सूखे एवं अकाल से निजात मिल सकती है।
साथ ही भूमिगत जल का कम होना, पेयजल संकट, चारागाह में आई कमी का स्थाई हल निकल सकता है। इस क्षेत्र के विकास के लिए हिमाचल एवं उत्तराखण्ड से निकलने वाली नदियों के व्यर्थ बहने वाले पानी को कच्ची नहरों से जोजरी-लूणी नदी में छोडऩे से गुजरात को भी फायदा मिल सकता है।
भारतीय किसान संघ के प्रयासों से सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय उदयपुर के सहायक आचार्य एवं भूगोलवेत्ता डॉ. राठौड़ की ओर से तैयार इस प्रस्तावित परियोजना को भारत सरकार द्वारा नदियों से नदियां जोडऩे वाले प्रोजेक्ट समिति को सौंपा गया है।
राठौड़ के अनुसार हिमालय से निकलने वाली नदियों में वर्षाकाल में बाढ़ के पानी को घग्घर नदी में छोडकऱ राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले से एक नहर का निर्माण कर हजारों क्यूबिक मीटर व्यर्थ में पाकिस्तान बहकर जाने वाले बरसाती पानी को नापासर, देशनोक, चाड़ी, डावरा, जोधपुर या सरदारशहर ताल-छापर, डेगाना, नागौर, आसोप, भोपालगढ़, जोधपुर या नागौर से मेड़ता के निकट जोजरी नदी में हिमालय का पानी लाया जा सकता है। जोधपुर या मेड़ता के निकट जोजरी (मीठड़ी) बरसाती नदी में छोड़ा गया पानी खेजड़ली खुर्द-सालावास के पास लूनी नदी में डाला जा सकता है।
यमुना भी कर सकती है निहाल
भूगोलवेत्ता के अनुसार यमुना नदी पर बने तेजावाला फीडर से वर्षा के दौरान छोड़े जाने वाली अतिरिक्त पानी को हरियाणा में सोनीपत के निकट नहर बनाकर रोहतक, महेन्द्रगढ़ से पिलानी, झुंझुनूं, मण्डवा, मुकुन्दगढ़, सीकर, डीडवाना, डेगाना से निकालकर नागौर जिले के मेड़ता के समीप निकलने वाली मीठड़ी (जोजरी) नदी में छोड़ा जा सकता हैं। यमुना का यह जल मिठड़ी नदी से बहता हुआ घघराना, घोड़ावट, पीपाड़ तथा खेजड़ली खुर्द के निकट लूनी नदी में पहुंच जाएगा। इस नदी में छोड़ा गया घग्घर-यमुना जल प्राकृतिक रूप से बहता हुआ समदड़ी, बालोतरा, सिणधरी, धोरीमन्ना तथा गुड़ा होता हुआ सांचोर तक पहुंचेगा।
जसवंत सागर भी रहेगा लबालब
परियोजना में सुझाए गए जलराशि के मार्ग के अनुसार घग्घर एवं यमुना का पानी मेड़ता से होकर आगे बढ़ेगा। मेड़ता से नहर के जरिए यह पानी जसनगर के निकट नदी में छोड़ा जाए तो जोधपुर जिले के सबसे बड़े बांध जसवंतसागर को बारह मास भरा रख सकता है।