जोधपुर

127 यात्री 63 अस्थि कलश ले हरिद्वार रवाना, 31 को भी एक बस जाएगी हरिद्वार

लॉकडाउन की अवधि में कई जनों के घरों में अपनों की मौत हुई लेकिन आवागमन के साधन बंद होने के कारण हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार अपनों के अस्थि कलश हरिद्वार गंगा में प्रवाहित करने नहीं जा सके। इनकी पीड़ा को लेकर राजस्थान पत्रिका ने भी 6 अप्रेल के अंक में 'अपनों के अंतिम संस्कार के लिए करना पड़ रहा इन्तजारÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर इनकी पीड़ा उजागर की थी।
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special roadways bus started for haridwar from jodhpur
127 यात्री 63 अस्थि कलश ले हरिद्वार रवाना, 31 को भी एक बस जाएगी हरिद्वार

वीडियो : जेके भाटी/जोधपुर. सरकार का धन्यवाद जो उन्होंने हमारी पीड़ा व भावनाओं को समझते हुए स्पेशल बसें शुरू की। जिसके कारण हम अपनों के अंतिम संस्कार करने हरिद्वार जा रहे हैं। ताकि गंगा में अपनों के अस्थि फूल प्रवाहित कर अंतिम संस्कार की रस्म अदा कर सकें। कुछ यह कहना था शुक्रवार दोपहर को हरिद्वार जा रहे यात्रियों का। उन्होंने सरकार के इस कदम की सराहना की तथा जय गंगे के जैकारे लगाते हुए हरिद्वार के लिए रवाना हुए।

लॉकडाउन की अवधि में कई जनों के घरों में अपनों की मौत हुई लेकिन आवागमन के साधन बंद होने के कारण हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार अपनों के अस्थि कलश हरिद्वार गंगा में प्रवाहित करने नहीं जा सके। इनकी पीड़ा को लेकर राजस्थान पत्रिका ने भी 6 अप्रेल के अंक में 'अपनों के अंतिम संस्कार के लिए करना पड़ रहा इन्तजार' शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर इनकी पीड़ा उजागर की थी। सरकार ने भी इन लोगों की पीड़ा को समझते हुए मोक्ष कलश स्पेशल बसें शुरू की।

सिलाई कामगारों ने की आर्थिक पैकेज की मांग
सिलाई कामगार संगठन ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ज्ञापन भेजकर आर्थिक पैकेज दिलाने की मांग की है।संगठन के प्रदेश संयोजक भीमराज राखेचा ने बताया कि कोरोना की वजह से सिलाई कार्य से जुड़े हजारों कारीगर बेरोजगार हो गए हैं। त्योहार और शादी ब्याह नहीं होने से कामकाज पूरा ठप हो गया। सिलाई दुकानदार और गारमेंट रेडीमेड का काम करने वाले 80 प्रतिशत कारीगर है जिनकी आर्थिक हालत खराब हो चुकी है।

Published on:
29 May 2020 08:56 pm