जोधपुर

हाळी अमावस्या पर बुजुर्ग लेते हैं अच्छे जमाने के शगुन

हाळी अमावस्या पर किसान आने वाले वर्ष में बेहतर जमाने की कामना के साथ अन्नदेवता से अच्छी फ सल पकने की प्रार्थना करते हैं।
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May 04, 2019
Special worship of agricultural tools in Marwar
हाळी अमावस्या पर बुजुर्ग लेते हैं अच्छे जमाने के शगुन

बेलवा (जोधपुर). बदलते सामाजिक परिवेश में ऐतिहासिक धार्मिक त्योहारों को लेकर शहरों में तो क्रेज खत्म हो रहा है, लेकिन गांवों में अभी भी प्राचीन परंपराएं व रिवाज कायम है।

हाळी अमावस्या पर किसान आने वाले वर्ष में बेहतर जमाने की कामना के साथ अन्नदेवता से अच्छी फ सल पकने की प्रार्थना करते हैं। हाळी अमावस्या पर किसान जहां अलसुबह खेतों में जाकर हळ जोतते है। बारिश की कामना को लेकर फ सलों की पूजा की जाती है और अन्नदेवता से अगले साल अच्छी पैदावार के साथ लोगों के खुशहाली की कामना करते हैं। अपने कृषि औजारों की विशेष पूजा अर्चना करते हैं।

वहीं जानकार बुजुर्ग घरों व खेतों के आसपास पशु-पक्षियों की आवाज व पेड़ों व प्राकृतिक दृश्य के आधार पर बारिश व फ सल पैदावार का अनुमान लगाते हैं।

हाळी अमावस्या पर अलसुबह लोग जमाने के शगुन लेने के बाद गांव की कोटड़ी में एकत्रित हो जाते है। जहां पर ग्रामीण आपस में हथाई करते है। हथाई में उस गांव के हर घर से भोजन का थाल आता है। इसमें व्यंजन के तौर पर खीच, गळोणी के साथ विभिन्न प्रकार की सब्जी परोसी जाती है।

इसके बाद में सभी लोग एकसाथ भोजन करते है। छोटे बच्चे भी स्वादिष्ट खीच के साथ मीठी खीर (गळोणी) बड़े आनंद के साथ खाते हैं। इस प्रकार का सामूहिक भोजन अमावस्या से आखातीज तक किया जाता है। हालांकि अब कार्य व्यस्तता के चलते गांवों के लोग हथाई में कम आते हैं।

Updated on:
04 May 2019 12:29 am
Published on:
04 May 2019 12:29 am