
जोधपुर।
मसाला उत्पादन में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्पादन की इस गति को बरकरार रखने के लिए मसालों की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरने में असफ ल हो रही है। इसका कारण मसालों में 'कीड़ेÓ लगना है। वैश्विक कोरोना महामारी भी मसालों की निर्यात गति को प्रभावित नहीं कर पाई, लेकिन मसालों में लगने वाले ये 'कीड़ेÓ निर्यात में बाधा बन रहे है। इससे किसानों को मसाला फ सलों की लागत निकलने में परेशानी आने लगी है है। प्रदेश में उत्पादित मिर्ची, धनिया, जीरा, मैथी व सौंफ सहित विभिन्न मसालों की गुणवत्ता अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा बेहतर होती है। किसानों में मसाला फ सलों की कटाई के बाद रखरखाव में जागरूकता की कमी तथा मसालों के भंडारण व पैकिंग के लिए पर्याप्त सुविधाओं के आभाव में मसालों में अन्तरराष्ट्रीय मानकों पर तय मानको से अधिक रासायनिक कंटेंट मसालों में आ जाते है। इससे मसालों का निर्यात प्रभावित हो रहा है।
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मिर्च निर्यात में बाधा एसपर्जीलस फ्लेवर
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मसालों में अलग प्रकार के फंगस लगने, जीवाणु लगने व उनसे निकलने वाले जहर की वजह से फसलों को नुकसान होता है। विश्व प्रसिद्ध जोधपुर की मिर्च में एसपर्जीलस फ्लेवर फंगस (इससे एफ्ला टॉक्सिन नामक जहर निकलता है) की मात्रा होने के कारण पिछले कुछ समय से निर्यात में परेशानी आ रही है। इसी प्रकार, जीरा, मैथी, धनिया, सौंफ आदि मसालों में अलग-अलग फंगस लगते है, जो फसल को नुकसान पहुंचाते है। बाजरा में क्लेबीसेप्स माइक्रोसिफेला फंगस लगता है, जो अर्गट नामक जहर निकालता है। इसके लिए किसानों को जागरूक होने की जरूरत है।
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निर्यात के समय 3 अशुद्धियों की जांच
- मसाले में कचरे की जांच
- मसाले में नमी, फंगस के अलावा साल्मोनेला नामक जीवाणु की जांच होती है
- मसालों में रसायन प्रदूषण की जांच। इसमें फसल में छिड़कने वाले कीटनाशियों के मापदण्ड़ों की जांच आदि होती है।
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वर्ष 2019-20 में देश से निर्यात होने वाले प्रमुख मसालों की स्थिति
मसाला-- मात्रा टन में---- मूल्य लाख में
मिर्च---- 484000---- 622170.00
जीरा----210000---- 322500.00
सौंफ----23800-----22888.00
मैथी----27660------16383.60
धनिया----50250----41110.00
यह देशभर की स्थिति है। राजस्थान के मसालों को गुणवत्ता व रंग के कारण प्रमुखता दी जाती है।