
जोधपुर.
राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) ने आदर्श पहल करते हुए राज्य सरकार (govt. of rajasthan) को निर्देश दिया है कि न्याय पालिका के परामर्श से सिविल कोर्ट, आपराधिक न्यायालय, सत्र न्यायालय, परिवार न्यायालय, श्रम न्यायालय और मोटर वाहन दुर्घटना दावा अधिकरण के लिए
सामान्य भवन मानक विकसित किए जाएं, ताकि बिल्डिंग कोड में शामिल होने से भविष्य में
सार्वजनिक निर्माण विभाग (pwd) या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा न्यायालय भवनों के निर्माण में इन मानकों को ध्यान में रखा जा सके।
कोर्ट ने इसके लिए हाईकोर्ट को राज्य सरकार के साथ मंथन के बाद छह सप्ताह के भीतर एक कमेटी गठित करने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश एस.रविंद्र भट्ट और न्यायाधीश अशोक कुमार गौड़ की खंडपीठ ने बार एसोसिएशन राजगढ़ की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि 35 न्यायिक जिलों में 338 न्यायिक परिसर हैं।
इनकी भौगोलिक विविधता व जरूरतों के लिहाज से स्थानीय अदालतों को अपेक्षित जरूरतों का आकलन करना चाहिए। अधीनस्थ न्यायालयों में दैनिक आधार पर लोगों की आवाजाही के औसत से इसका आकलन किया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने 401 करोड़ रुपए के प्रस्ताव भेजे
हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से अधिवक्ता डॉ.सचिन आचार्य ने कोर्ट को बताया कि जिला न्यायालयों में एडवोकेट्स चैम्बर, बार रूम, केंटीन, लिटिगेंट शेड, लॉक-अप, पार्किंग, वाटर कूलर तथा टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के लिए जरूरतों का आकलन किया जा चुका है। इसके आधार पर सभी 35 न्यायिक जिलों के लिए राज्य सरकार को 401.48 करोड़ रुपए के प्रस्ताव स्वीकृति के लिए भिजवाए गए हैं।
इस पर खंडपीठ ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालयों को आवश्यकताओं का आकलन करते समय पर्याप्त आकार के कोर्ट रूम और जज चैंबर, लाइब्रेरी, बार रूम, लेडीज बार रूम, पर्याप्त टॉयलेट (पुरुष और महिलाओं के लिए),केंटीन, वादियों के लिए प्रतीक्षा क्षेत्र जैसी सुविधाएं, पानी, बार लाइब्रेरी, लोक अदालत/मध्यस्थता के लिए स्थान, टाइपिंग की सुविधा, पुलिस लॉक-अप के लिए प्रावधान, रैंप, लिफ्ट और दिव्यांगों के लिए अनुकूल सुविधाओं को सम्मिलित करना चाहिए।
कोर्ट ने राज्य में अदालतों के भवन मानक विकसित करने के लिए हाईकोर्ट प्रशासन को राज्य सरकार व अन्य प्राधिकरणों से विमर्श के बाद एक कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें कम से कम दो इंजीनियर या आर्किटेक्ट, बार एवं जिला न्यायपालिका का एक प्रतिनिधि, डिजिटलीकरण और कम्प्यूटरीकरण के संबंध में एक इनडोर विशेषज्ञ को शामिल किया जाएगा। भवन मानकों में आवश्यक रूप से दिव्यांगों के लिए प्रत्येक अपेक्षित सुविधाओं का समावेश होगा। अगली सुनवाई 1 नवंबर को होगी।