
जोधपुर। पाकिस्तान में प्रताड़ना झेल कर भारत में खुशहाल जिंदगी जीने का सपना देख आए पाक विस्थापित हिंदुओं की परेशानियां यहां कम नहीं हुई है। आने के बाद से नागरिकता मिलने तक रहने का स्थाई ठिकाना नहीं होने से दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। सुकून तो बस इतना की यहां सुरक्षित हैं, लेकिन नागरिकता तक पहुंचने में सरकारी नियम कायदे इनके लिए जी का जंझाल बने हुए हैं।
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खासतौर से भारत में रहने के लिए नागरिकता से पहले एलटीवी (लॉन्ग टर्म वीजा) लेना जरूरी होता है। एलटीवी के बाद ही आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य सुविधाएं मिलती है। हालात यह है कि तमाम औपचारिकताएं पूरी कर एलटीवी आवेदन करने वाले सैंकड़ों लोग बरसों से इसका इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। एलटीवी मिलने के बाद भी नागरिकता मिलने में भी बरसों लग रहे हैं। पत्रिका ने जोधपुर के चौखा क्षेत्र रहने वाले विस्थापितों से जानी उनकी परेशानी।
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3 साल से इंतजार
पाकिस्तान में मुनीम रहे दयाराम परिवार के साथ 26 जनवरी 2020 को भारत आया था। तीन साल से एलटीवी का इंतजार हैं। जुलाई में सभी पासपोर्ट एक्सपायर हो जाएंगे। नवीनीकरण के लिए 50 हजार खर्च करने पड़ेंगे। पाकिस्तान में तीस हजार की नौकरी थी, यहां किराणे का ढाबा चलाकर गुजारा करना पड़ रहा है।
4 साल से इंतजार
डेरो राम अपने परिवार के सात लोगों के साथ अप्रेल 2019 में आया था। अभी एलटीवी नहीं मिली। पाकिस्तान में खेतीबाड़ी करता था। यहां लकड़ी का काम करता है। सभी पासपोर्ट एक्सपायर हो चुके हैं। बच्चों को बड़ी कक्षा में पढ़ाने के लिए आधार चाहिए। बिना एलटीवी के नहीं बनेंगे। यहां अस्थाई जगह पर रह रहे हैं।
नागिरकता मिलने में लगे 11 साल
पाकिस्तान में नर्सिंग करने वाले दिलीप कुमार 2009 में आए थे। उस समय पासपोर्ट नवीनीकरण की बाध्यता नहीं थी। इसलिए एलटीवी मिली तो नागरिकता का आवेदन कर दिया। पढ़े-लिखे होने से सजगता रख कागजी कार्रवाई पूरी की तो 2021 में उनको, पत्नी और मां को नागरिकता मिल कई, लेकिन बच्चों की अभी बाकी है।