
जोधपुर. डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज संबद्ध महात्मा गांधी अस्पताल में जैसलमेर निवासी 14 वर्षीय बालिका की मुड़ी हुई रीढ़ हड्डी को 7 घंटे के जटिल ऑपरेशन के बाद सीधा कर दिया गया। इस ऑपरेशन को स्कोलियोसिस सर्जरी कहा जाता है। इस ऑपरेशन की जटिलता गुर्दा व लीवर प्रत्यारोपण जैसी मानी जाती है, लेकिन चिकित्सकों ने सूझबूझ के साथ ऑपरेशन को बेहतर ढंग से अंजाम दे दिया। ऑर्थोपेडिक के विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण वैश्य ने बताया कि यूनिट हैड डॉ. किशोर रायचंदानी के नेतृत्व में रीढ़ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. महेन्द्र टाक ने ऑपरेशन को बेहतर रूप से अंजाम दिया। डॉ. टाक के अनुसार बालिका में रीढ़ की हड्डी का टेढ़ापन लगातार बढ़ता जा रहा था। अहमदाबाद में चिकित्सकों ने इलाज के 4-5 लाख रुपए बताए, लेकिन एमजीएच में बच्ची का ऑपरेशन आयुष्मान भारत महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत नि:शुल्क कर दिया गया। जबकि गत चार माह पहले भी एमजीएच ने स्कोलियोसिस सर्जरी की थी। ऑपरेशन में डॉ. अनूप, डॉ. नंदलाल, डॉ. पूनमचंद, डॉ. जियालाल, निश्चेतना में डॉ. फतेहसिंह भाटी के मार्गदर्शन में डॉ. गायत्री तंवर, डॉ. हेमलता, नर्सिंग स्टाफ इकबाल कायमखानी व अर्जुनसिंह का सहयोग रहा। हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ राजश्री बेहरा ने टीम को बधाई दी।
एमजीएच में बढ़े हैं जटिल बीमारियों के ऑपरेशन
एमजीएच में पहले रीढ़ की हड्डी के फ्रेक्चर के ऑपरेशन होते थे। अब रीढ़ की हड्डी की टीबी, स्लिप डिस्क, नस का दबना, सरवाईकल नस का दबना, स्पाइन के कैंसर, रीढ़ की हड्डी के टेढ़ेपन के इलाज जैसे ऑपरेशन आधुनिक तकनीक से हो रहे है। इसमें मिनमल इनवेसिव सर्जरी, एंडोस्कोपिक सर्जरी, न्यूरोमॉनिटरिंग व सर्वाइकल सर्जरी शामिल है। कई मरीज अहमदाबाद जाने से रूक रहे है। साल 2018 में इस तरह के ऑपरेशन 10 होते थे, लेकिन 2019 में 100 और 2020 में 150 ऑपरेशन किए जा चुके हैं।
अब ऑर्थो स्पाइन यूनिट का इंतजार
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने बजट में भी एमजीएच में ऑर्थो स्पाइन यूनिट अलग से खोलने की घोषणा की है, इसकी वजह भी ऐसे मरीजों का सरकारी अस्पतालों के बढ़ती सेवाओं का रूझान माना जा रहा है। इस यूनिट के खुलने का इंतजार सभी को बेसब्री से है।