
राजेश दीक्षित
जोधपुर. यह ‘शीर्षक’ देखकर आप चौंक जरूर गए होंगे, लेकिन जोधपुर नगर निगम की राजनीति का यह अजीब संयोग है। जो पिछले ढाई दशक से अधिक समय से चला आ रहा है। जोधपुर में अब तक जितने भी महापौर व कार्यवाहक महापौर हुए , उनके राजनीतिक कॅरियर लगभग पूर्ण विराम ही लग गया। जबकि पार्षद बने कई नेता विधायक और सांसद तक बन गए। ऐसा नहीं है कि महापौर रहे नेताओं ने यह मिथक तोडऩे का प्रयास नहीं किया हो, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पाई है।
ये पार्षद विधायक भी बने
सूर्यकांता व्यास, भंवर बलाई, मानसिंह देवड़ा, मनीषा पंवार जहां पार्षद रहने के बाद विधायक पद तक पहुंचे हैं, वहीं अमिता चौधरी जिला प्रमुख बनी हैं। राजेन्द्र सोलंकी यूआईटी चेयरमैन रहे। इसके बाद जेडीए अध्यक्ष पद पर रहे। विधायक का चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन हार गए। इसी तरह राज्य के पूर्व मंत्री राजेन्द्र गहलोत निवर्तमान बोर्ड में पार्षद रहने के बाद हाल ही राज्यसभा सदस्य बने हैं। इसी तरह मेघराज लोहिया राजसिको अध्यक्ष रहे।