
जोधपुर।
राजस्थान में खारे पानी की अधिकता है, एेसे में यहां झींगा मछली उत्पादन की प्रबल संभावनाएं है। इससे मछली उत्पादन के साथ किसानों की आय भी बढ़ाई जा सकती है। यह बात केन्द्रीय मत्स्यकी अनुसंधान संस्थान मुंबई के पूर्व कुलपति डॉ. वजीरसिंह लाकड़ा ने कहीं। मण्डोर स्थित कृषि विश्वविद्यालय के छठे स्थापना दिवस पर बतौर अति विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. लाकड़ा ने बताया कि भारत का मछली उत्पादन के क्षेत्र में तीसरा स्थान है और हर वर्ष 10 मिलियन टन मछली का उत्पादन किया जाता है। 2020 तक मछली उत्पादन15 मिलियन टन किए जाने का लक्ष्य है। समारोह के मुख्य अतिथि सरदार पटेल पुलिस युनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति एमएल कुमावत ने देश के विकास के लिए विश्वविद्यालय को सर्वोत्तम स्थान बताया। उन्होंने उदाहरण दिया कि दुनिया के 100 श्रेष्ठ विश्वविद्यालयो में 50 विश्वविद्यालय अमरीका के है। इस कारण से अमरीका पूरी दुनिया में अग्रणी राष्ट्र है। उन्होंने कहा कि देश के आजाद होने के समय अनाज का आयात करना पड़ता था लेकिन आज देश की 130 करोड़ आबादी होने के बावजूद खाद्यान्न के भंडार भरे हुए है। इसके लिए कृषि वैज्ञानिक व किसान बधाई के पात्र है। समारोह की अध्यक्षता करते हुए विवि के कुलपति डॉ बलराज सिंह ने विश्वविद्यालय में पिछले एक वर्ष में शिक्षा, अनुसंधान, प्रसार, उन्नत बीज उत्पादन व आधारभूत ढाचे की प्रगति के बारे में बताया।कुलपति डॉ. सिंह ने बताया कि यह विवि के लिए गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि विवि ने कम समय में उपलब्धि हासिल की है, जो सराहनीय है। समारोह में विशिष्ट अतिथि काजरी निदेशक डॉ. ओपी यादव, अटारी निदेशक डॉ एसके सिंह सहित कृषि विभाग के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, विवि के अधिकारी कर्मचारी व विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम में अतिथियों ने वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों द्वारा तैयार दो पोस्टर का विमोचन भी किया। अंत में विवि के कुलसचिव ओपी विश्नोई व जनसंपर्क अधिकारी डॉ. एमएल महरिया ने धन्यवाद ज्ञापित किया।