जोधपुर

‘सूरज’ की चमक को सरकारी उदासीनता का ‘ग्रहण’

- नए वित्तीय वर्ष में नहीं मिल रही रूफ टॉप सोलर प्लांट पर मिलने वाली सब्सिडी - केन्द्र और राज्य सरकार से सोलर प्लांट पर मिलने वाली सब्सिडी का नया प्रोजेक्ट नहीं हुआ लॉन्च - सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के प्रयास को झटका  
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May 17, 2019
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‘सूरज’ की चमक को सरकारी उदासीनता का ‘ग्रहण’

अविनाश केवलिया/ जोधपुर.

जिस सूरज की चमक का गुमान आज पूरा प्रदेश कर रहा है उसे ही सरकारी उदासीनता का ग्रहण लग गया है। हम सूरज की उस चमक की बात कर रहे हैं जिससे कई घर रोशन हो रहे हैं। ग्रीन एनर्जी का प्रमुख स्रोत सौर ऊर्जा है। राजस्थान में प्रदेश की करीब आधी बिजली ग्रीन एनर्जी के रूप में बन रही है। केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से पिछले साल तक सोलर प्रोजेक्ट पर दी जाने वाली अनुदान राशि इस साल बंद कर दी गई है। अब तक प्रोजेक्ट का नवीनीकरण नहीं किया गया है। ऐसे में सोलर रूफ टॉप प्रोजेक्ट लगाना काफी महंगा साबित हो रहा है।
राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आरआरईसीएल) की ओर से भवनों की छत पर लगने वाले रूफ टॉप सोलर प्लांट के लिए करीब 30 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। लेकिन वर्ष 2018-19 की समाप्ति के साथ ही इस सब्सिडी प्रोजेक्ट की मियाद भी खत्म हो गई। चुनावी प्रक्रिया में इसका नवीनीकरण नहीं किया जा सका। ऐसे में राजस्थान जैसे प्रदेश जहां सूर्य किरणों से सर्वाधिक सोलर एनर्जी जनरेट की जाती है वहां नए रूफ टॉप सोलर प्रोजेक्ट लगना बंद सा हो गया है।

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यों लगाते हैं सोलर सिस्टम

- एक किलोवाट से एक मेगा वाट का सोलर सिस्टम लगता है।

- एक किलोवाट के सिस्टम के लिए न्यूनतम 10 स्क्वायर मीटर जगह की आवश्यकता होती है।
- 4 यूनिट बिजली प्रति किलोवाट सामान्यत: बनती है।

- इस सोलर प्लांट की उम्र करीब 25 वर्ष तक होती है।
- 30 प्रतिशत तक मिलती है सब्सिडी।

सौर ऊर्जा का महत्व

- 3 से 4 हजार मेगावाट बिजली पश्चिमी राजस्थान के ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर में बन रही है।
- यह प्रदेश में बनने वाली बिजली का 50 प्रतिशत है।

- 2 से 2500 मेगावाट तक सोलर जनरेशन है वर्तमान में पूरे प्रदेश में।

ऑफ ग्रिड पर डिस्कॉम की मेहरबानी जारी रहेगी
ऑफ ग्रिड सिस्टम पर भी केन्द्र और राज्य सरकार की सब्सिडी मिलती है। यहां केन्द्र सरकार 75 प्रतिशत और राज्य सरकार 20 प्रतिशत तक सब्सिडी देती है। इसमें 37 वॉट से 200 वॉट तक का सोलर पैनल ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों में लगाया जाता है जहां बिजली सिस्टम के तहत इलेक्ट्रिफिकेशन संभव नहीं है। ऐसे प्रोजेक्ट में महज 5 प्रतिशत ही कुल लागत राशि उपभोक्ता से ली जाती है।

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पिछले साल तक सब्सिडी दी जाती थी। लेकिन इस वर्ष अब तक नया प्रोजेक्ट नहीं आया है। ऐसे में रूफ टॉप सोलर प्लांट पर मिलने वाली सब्सिडी भी बंद है। चुनाव बाद कोई नया प्लान आता है तो कार्यवाही करेंगे।
- अनिल गुप्ता, प्रबंध निदेशक, आरआरईसीएल राजस्थान

Published on:
17 May 2019 08:28 pm