जोधपुर

लाखों का पैकेज छोड़ शुरू की खेतीबाड़ी, एमबीए पति व सीए पत्नी की पढि़ए ये सक्सेस स्टोरी

अक्सर देखा जाता है कि परिवार के पास खेती योग्य जमीन होते हुए भी युवा नौकरी के लिए मारे-मारे भटकते हैं। इससे हटकर, ललित देवड़ा और उनकी पत्नी खुशबू ने लाखों का पैकेज छोडकऱ खेतीबाड़ी संभाली और अब कामयाबी की तरफ बढ़ रहे हैं।
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success story of husband wife farmers in jodhpur
लाखों का पैकेज छोड़ शुरू की खेतीबाड़ी, एमबीए पति व सीए पत्नी की पढि़ए ये सक्सेस स्टोरी

जोधपुर. अक्सर देखा जाता है कि परिवार के पास खेती योग्य जमीन होते हुए भी युवा नौकरी के लिए मारे-मारे भटकते हैं। इससे हटकर, ललित देवड़ा और उनकी पत्नी खुशबू ने लाखों का पैकेज छोडकऱ खेतीबाड़ी संभाली और अब कामयाबी की तरफ बढ़ रहे हैं। ललित एमबीए डिग्रीधारी व पत्नी सीए है। पढ़ाई के तुरंत बाद इनके पास जॉब के ऑफर आए लेकिन मिट्टी से जुडऩे की ललक इन्हें घर व माटी तक खींच लाई। नौकरी छोड़ अब पूरी तरह खेतीबाड़ी में रम गए हैं।

फाइनेंस में अव्वल रहे
शहर से करीब 12 किमी दूर उजीर सागर मंडोर निवासी ललित ने पूणे महराष्ट्र से एमबीए की पढ़ाई पूरी की। मार्केटिंग और फाइनेन्स में अव्वल रहे। एक निजी बैंक कम्पनी से सिक्योरिटी रिलेशनशिप मैनेजर के लिए 6 लाख रुपए का ऑफर आया। कई अन्य निजी कम्पनियों ने आठ से दस लाख रुपए तक का ऑफर भी दिया, लेकिन इसे ठुकराकर अपने गांव आ गए। यहां आकर पाली निवासी खुशबू से शादी की। खुशबू ने भी बाद में नौकरी छोड़ ललित का खेतीबाड़ी में साथ दिया।

इसलिए आया आइडिया
बकौल ललित बड़े शहरों में कई कम्पनियां हर साल सब्जी के व्यवसाय से करोड़ों रुपए कमाती है जबकि उनके पास इतनी ज़मीन भी नहीं है। उन्होंने गुजरात जाकर देखा तो पता चला कि एक से दो बीघा ज़मीन पर आधुनिक तरीके से उद्यानिकी फसलों व संरक्षित खेती के माध्यम से यह कार्य किया जा सकता हैं। बस यहीं से उन्होंने ठान लिया कि खेती ही करेंगे।

पिता से केवल 400 वर्गमीटर जमीन मांगी

ललित ने बताया कि जब वे लाखों की नौकरी छोडकऱ घर आए और खेती की इच्छा जताई तो सभी ने ताना मारा। पिता ब्रह्मसिंह से पारिवारिक 12 बीघा में से केवल 400 वर्ग मीटर जमीन मांगी। इसमें फिर उन्होंने सेडनेट हाउस लगाया। बाद में पोली और नेट हाउस भी बना दिए। सबसे पहले टर्की से बीज मंगवाकर खीरा उगाया। कुल 40.50 टन खीरा ककड़ी का उत्पादन हुआ। इस कामयाबी के बाद तो ताना मारने वाले भी साथ देने लगे।


लगातार खेतीबाड़ी में अपडेट

ललित ने परिस्थिति को ग्रीन हाउस से अनुकूल बनाया। बूंद-बूंद सिंचाई का उपयोग किया। इससे वातावरण को ठंडा करने और अधिक धूप से बचाव का भी काम होता है। ककड़ी के अलावा लाल पीली शिमला मिर्च, टमाटर की फसल उगा चुके हैं। खेती में बढ़ते रसायनों के उपयोग को कम करने के लिए उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा दिया। वर्मी कंपोस्ट इकाई भी लगाई।

Updated on:
01 Sept 2019 01:41 pm
Published on:
01 Sept 2019 01:41 pm