जोधपुर

जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में पहली बार हुई स्लिंग सर्जरी, 21.8 प्रतिशत महिलाओं में होती है बीमारी

बार-बार सामान्य प्रसव करने वाली महिलाओं में यह मांसपेशी कमजोर हो जाती है। इसके अलावा धूम्रपान, मोटापा, कब्ज, कैफीन व एल्कोहल का अधिक उपयोग, हार्मोन बदलाव, क्रोनिक कफ की वजह से यह बीमारी हो जाती है। जिससे हंसने, छींकने, खांसने, कूदने, व्यायाम करने, भारी वस्तु उठाने और रतिक्रिया के दौरान अपने आप ही मूत्र निकल आता है।
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successful sling surgery performed at MDM hospital of jodhpur
जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में पहली बार हुई स्लिंग सर्जरी, 21.8 प्रतिशत महिलाओं में होती है बीमारी

गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. अगर आपके खांसते, छींकते या हंसते समय मूत्र निकल आता है तो घबराए मत। यह भी एक बीमारी है जिसका इलाज संभव है। केवल आधे घण्टे की सर्जरी द्वारा मरीज को इस रोग से राहत प्राप्त हो जाती है। इसको ‘स्लिंग सर्जरी’ कहते हैं। डॉ. सम्पूर्णानंद मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध मथुरादास माथुर अस्पताल में इसी सप्ताह पहली बार स्लिंग सर्जरी की गई है। सर्जरी करवाने वाली जोधपुर निवासी 60 वर्षीय महिला स्वस्थ है। उनको दो दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

क्या है बीमारी
इस बीमारी को ‘स्ट्रेस इनकंटीनेंस’ कहते हैं। यह पुरुषों की तुलना में महिलाओं में दुगुनी होती है। मूत्र नलिका के चारों और स्थित स्टिंचर मांसपेशी और हिप को सहायता देने वाली पेल्विक मांसपेशी के कमजोर हो जाने की वजह से कोई भी भारी शारीरिक गतिविधि होने पर मूत्र अपने आप ही मूत्राशय से बाहर आ जाता है। इससे सामाजिक स्तर पर भी मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पुरुषों में दो स्ट्रिंचर मांसपेशी होती है, जबकि महिलाओं में केवल एक होती है।

बार-बार सामान्य प्रसव करने वाली महिलाओं में यह मांसपेशी कमजोर हो जाती है। इसके अलावा धूम्रपान, मोटापा, कब्ज, कैफीन व एल्कोहल का अधिक उपयोग, हार्मोन बदलाव, क्रोनिक कफ की वजह से यह बीमारी हो जाती है। जिससे हंसने, छींकने, खांसने, कूदने, व्यायाम करने, भारी वस्तु उठाने और रतिक्रिया के दौरान अपने आप ही मूत्र निकल आता है। एक अध्ययन के मुताबिक भारत में 21.8 प्रतिशत महिलाओं को रजोनिवृत्ति के बाद यह बीमारी हो जाती है।

क्या है स्लिंग सर्जरी
स्टे्रस इनकंटीनेंस बीमारी के इलाज के लिए स्लिंग सर्जरी की जाती है। स्लिंग एक कृत्रिम धागेनुमा संरचना होती है जिसे मूत्र नलिका से सम्बद्ध कर मांसपेशी को मजबूत कर दिया जाता है। सर्जरी के बाद मरीज सामान्य दायक जीवन व्यतीत कर सकता है।

अधिकांश लोगों को पता नहीं, यह बीमारी है
यह सर्जरी सामान्य है लेकिन अस्पताल में पहली बार यह सर्जरी हुई है। इस रोग से ग्रसित अधिकांश लोगों विशेषकर महिलाओं को यह पता नहीं है कि यह बीमारी है और इसका इलाज संभव है। लोगों में जागरुकता की जरुरत है।
- डॉ. प्रदीप शर्मा, यूरोलॉजी विभाग, एमडीएम अस्पताल जोधपुर

Published on:
16 Dec 2019 11:30 am