
जोधपुर। निजी अस्पतालों में भी कोविड मरीजो को निर्धारित मापदंडों पर बेहतर इलाज मिल सके, इसके प्रयास जिला प्रशासन की कमेटी का गठन किया गया है। सीएमएचओ डॉक्टर बलवंत मंडा ने बताया कि जिला कलक्टर इंद्रजीत सिंह के निर्देशन में कमेटी जिले के निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर उनमें कोविड-19 मरीजों को दिए जा रहे उपचार के मापदंडों की पड़ताल की। कमेटी में जिला परिषद सीईओ, एडीएम तृतीय, सीएमएचओ, डीटीओ की टीम शहर के दार-उल-शिफा हॉस्पिटल कमला नगर व सोना देवी हॉस्पिटल, खेमे के कुंआ, पाल रोड़ औचक निरीक्षण को पहुंची। इस दौरान कमेटी ने पाया कि उक्त अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों का उपचार कोविड-19 गाइडलाइन के मापदंडों के अनुरूप नहीं हो रहा। सोना देवी अस्पताल में मिली अनियमितता के कारण सरकारी चिकित्सक सहायक आचार्य के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला कलक्टर की ओर से डॉ एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को प्रकरण भिजवाया गया। साथ ही बिना किसी चिकित्सक की मौजूदगी के मरीज भर्ती होने के कारण आयुष्मान भारत महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना में इसकी सम्बद्धता समाप्त करने का निर्णय लिया गया। राजस्थान महामारी अधिनियम 1957 एवं आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत कार्रवाई करने के लिए नोटिस जारी हुए हैं। दार-उल-शिफा हॉस्पिटल में फिजिशियन द्वारा कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार में कोविड गाइडलाइन की पालना नहीं करने तथा कोविड व नोन कोविड रोगियों की पृथकता नहीं पाए जाने पर नोटिस दिया गया।सरकारी चिकित्सक ने निजी अस्पताल में भर्ती करवाए मरीज सोना देवी हॉस्पिटल में निरीक्षण के दौरान महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए कि कई ऐसे मरीज भर्ती मिले जो कि एमडीएम में रक्त रोग विशेषज्ञता के सहायक आचार्य के रूप में राजकीय सेवा में कार्यरत चिकित्सक द्वारा प्रेक्टिस के दौरान डेडीकेटेड कोविड हॉस्पिटल के लिए रेफर किए गए थे। लेकिन यह रोगी सोना देवी हॉस्पिटल जोधपुर में भर्ती हुए।