
पीपाड़सिटी (जोधपुर) . घर से राजकीय अस्पताल में लाए गए मरीज की अज्ञात कारणों से हुई मौत पर शुक्रवार देर रात हंगामेदार हुई स्थिति को समझाइश के बाद निपटा लिया गया। इस घटना से चिकित्सकों में खौफ का माहौल पैदा हो गया।
सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को एक मरीज अस्पताल बंद होने के बाद कमर दर्द के उपचार के आया। ऑनकॉल चिकित्सक ने पूरी जानकारी लेने के बाद उसका एक्स-रे करवाकर आवश्यक दवा लिख दी। एक दर्द कम करने का इंजेक्शन भी लिखा। इसके बाद मरीज के परिजन बाहर से इंजेक्शन लेकर भर्ती वार्ड में आए और ड्यूटी पर कार्यरत मेल नर्स ने चिकित्सक की पर्ची के अनुसार इंजेक्शन लगा दिया। इसके बाद मरीज घर चला गया।
वहां पुन: तबीयत बिगडऩे पर उसे फिर से अस्पताल लाया गया। जहां ऑनकॉल चिकित्सक ने जांच की,इसके बाद फिजिशियन भी पहुंचे और उपचार करने लगे इसी बीच मरीज की मृत्यु हो गई। इसी दौरान कुछ लोगों ने गलत इंजेक्शन की अफवाह फैला दी। इससे मामला बिगड़ गया जिसे देर रात तक कंट्रोल किया जा सका।
ये भी पहुंचे अस्पताल
देर शाम उपजिला मजिस्ट्रेट शैतान सिंह राजपुरोहित, पुलिस थानाधिकारी बाबूलाल राणा और प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेंद्र परिहार भी भर्ती वार्ड में आ पहुंचे। इसके साथ पूर्व पालिकाध्यक्ष महेंद्र सिंह कच्छवाह आए और मरीज की मौत का कारण चिकित्सकों की लापरवाही बताया। उन्होंने चिकित्सकों को फटकार भी लगाई। इसी बीच पूर्व पालिकाध्यक्ष बाबूलाल टाक भी पहुंचे गए। उन्होंने मरीज की मौत पर राजनीति करने को गलत बताया। इससे दोनों पूर्व पालिकाध्यक्ष आपस में उलझ गए। अधिकारियों ने दोनों को शांत कराया।
आकस्मिक मृत्यु करार
उपजिला मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में मरीज की बीमारी और उपचार की प्रक्रिया की प्रारंभिक जांच में सब कुछ चिकित्सा प्रक्रिया के अनुरूप पाने के बाद गलत इंजेक्शन को अफवाह घोषित किया गया। मरीज के एक वर्ष से कमर दर्द की बीमारी होने का भी खुलासा हुआ। उसकी मौत के पीछे साइलेंट हार्टअटैक की संभावना व्यक्त की गई। इस पर मरीज के परिजन शव ले जाने पर सहमत हो गए।
इनका कहना है
अस्पताल में मरीज का उपचार उसकी बीमारी के अनुरूप प्रोटोकॉल के तहत किया गया, इसमें कोई लापरवाही सामने नहीं आई।
-शैतान सिंह राजपुरोहित, उपजिला मजिस्ट्रेट, पीपाड़सिटी।
मृतक के परिजनों ने चिकित्सा में लापरवाही को लेकर पुलिस में कोई शिकायत पेश नहीं की है।
-बाबूलाल राणा, पुलिस थानाधिकारी, पीपाड़सिटी।
अस्पताल में सुविधाओं के विकास से मरीजों को रेफर करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगा है। इससे रोगी परिवहन से जुड़े कुछ लोग अनावश्यक अफवाहों को हवा देने लगे हैं।
-सुरेंद्रसिंह परिहार, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, पीपाड़सिटी।