जोधपुर

Jodhpur: ​​​​​आत्मघाती ड्रोन ‘दिव्यास्त्र एमके-1’ का सफल परीक्षण, 500KM की रेंज-हवा में रह सकता है 5 घंटे

Divyastra Mk-1: जोधपुर में स्वदेशी आत्मघाती ड्रोन ‘दिव्यास्त्र एमके-1’ का सफल परीक्षण किया गया। 500 किलोमीटर रेंज वाला यह ड्रोन निगरानी और सटीक हमले दोनों में सक्षम है।

2 min read
Jun 01, 2026
एसयूवी पर बने मोबाइल लॉन्चर पर तैनात दिव्यास्त्र एमके-1। फोटो- पत्रिका

जोधपुर। भारतीय सेना की सामरिक क्षमताओं को नई मजबूती देने की दिशा में जोधपुर में स्वदेशी आत्मघाती ड्रोन ‘दिव्यास्त्र एमके-1’ का सफल प्रदर्शन किया गया। अत्याधुनिक तकनीक से लैस इस मानवरहित प्रणाली ने कठिन परिस्थितियों में अपनी क्षमता साबित करते हुए सेना के वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। मोबाइल लॉन्चर से संचालित होने वाला यह ड्रोन दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ सटीक हमले करने में सक्षम है।

यह वीडियो भी देखें

ये भी पढ़ें

Jhunjhunu News: 17 दिन पहले बेटे के जन्म की खुशियां, अब तिरंगे में लिपटकर घर लौटा सेना का जवान, पत्नी हुई बेसुध

रक्षा क्षेत्र की कम्पनी होवरिट की ओर से विकसित ‘दिव्यास्त्र एमके-1’ का परीक्षण जोधपुर में एसयूवी पर लगाए गए मोबाइल लॉन्चर से किया गया। प्रदर्शन के दौरान कई बार सफल लॉन्चिंग की गई और हर परीक्षण में ड्रोन ने निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रदर्शन किया। इसकी अधिकतम परिचालन रेंज 500 किलोमीटर तक है, जबकि यह लगातार पांच घंटे तक हवा में रह सकता है। ड्रोन में इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सेंसर, कम्युनिकेशन रिले सिस्टम तथा मिशन की आवश्यकता के अनुसार विभिन्न प्रकार के वारहेड लगाए जा सकते हैं।

53 डिग्री सेल्सियस तापमान पर परखा

यही विशेषताएं इसे निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने, लक्ष्य की पहचान और सटीक हमले जैसे अभियानों के लिए प्रभावी बनाती हैं। परीक्षण के दौरान इसकी इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (आईएसआर) क्षमताओं को भी परखा गया। खास बात यह रही कि ‘दिव्यास्त्र एमके-1’ को 53 डिग्री सेल्सियस तापमान और 50 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से चल रही हवाओं के बीच संचालित किया गया, जहां इसने सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया।

क्या फर्क है ड्रोन व आत्मघाती ड्रोन में

सामान्य ड्रोन का उपयोग मुख्य रूप से निगरानी, जासूसी और सूचनाएं जुटाने के लिए किया जाता है, जबकि आत्मघाती ड्रोन या लोइटरिंग म्यूनिशन लक्ष्य को नष्ट करने के उद्देश्य से विकसित किए जाते हैं। यह लंबे समय तक हवा में मंडरा सकते हैं और लक्ष्य की पहचान होने पर सीधे उस पर हमला कर खुद भी नष्ट हो जाते हैं।

दिव्यास्त्र एमके-1 की सबसे बड़ी विशेषता इसका मोबाइल लॉन्चर सिस्टम है। इसे किसी वाहन पर लगाकर जरूरत के अनुसार किसी भी स्थान पर पहुंचाया जा सकता है। युद्धक्षेत्र में तेजी से बदलती परिस्थितियों के बीच यह क्षमता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों, रेगिस्तान और घने जंगलों जैसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में यह प्रणाली भारतीय सेना के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

ये भी पढ़ें

Rajasthan: अवैध खनन के विरोध में धरने पर बैठे ग्रामीणों पर फायरिंग, पांच को लगी गोली, पुलिस बल तैनात
Also Read
View All