
जोधपुर।
कोविड मरीजों को ऑक्सीजन की किल्लत के चलते प्राणवायु बन आए ऑक्सीजन कन्संट्रेटर का गलत उपयोग भी मरीजों के लिए ब्लेक फ ंगस (म्यूकरमाइकोसिस) का खतरा पैदा कर रहा है। कोविड मरीजों में ब्लेक फंगस का खतरा कम करने के लिए ऑक्सीजन कन्संट्रेटर के लिए सबसे उपयोगी जीवनदायिनी जल (डिस्टिल वाटर) की पूर्ति करने के लिए शहर के उद्यमियों ने भागीरथ बन डिस्टिल वाटर की पूर्ति करने की पहल की है। जोधपुर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की ओर से शहर व ग्रामीण क्षेत्रों के लिए करीब 500 लीटर डिस्टिल वाटर नगर निगम को भेंट की गई, ताकि ऑक्सीजन कन्संट्रेटर का सही रखरखाव किया जा सके।
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डिस्टिल वाटर या आरओ वाटर ही उपयोगी
ऑक्सीजन कन्संट्रेटर के हयूमिडिफ ायर में उपयोग के दौरान इसमें डिस्टिल वॉटर/आरओ वाटर का ही उपयोग किया जाता है। कई अस्पतालों और घरों पर उपयोग के दौरान इसकी जानकारी नहीं होने के कारण सादा पानी का ही उपयोग किया जा रहा है, इससे कोरोना के मरीज में ऑक्सीजन प्राणवायु बनने के साथ ही सादा-पानी ब्लेक फ ंगस का संक्रमण पैदा कर सकता है।
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म्यूकोर्मिसेट्स सूक्ष्म जीवों से होती है बीमारी
पर्यावरण में प्राकृतिक रूप से मौजूद म्यूकोर्मिसेट्स नामक सूक्ष्म जीवों के एक समूह के कारण ब्लेक फंगस बीमारी होती है। ये सूक्ष्म जीव ज्यादातर मिट्टी-पत्तियों, खाद जैसे कार्बनिक पदार्थों के क्षय में पाए जाते है। इन कारकों के कारण कोविड-19 मरीजों को म्यूकोर्मिसेट्स जैसे सूक्ष्म जीवों के हमले के खिलाफ लड़ाई में विफ ल होने के नए खतरे का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर/ऑक्सीजन प्लांट के द्वारा जो ऑक्सीजन दी जाती है यदि उसका सही से रखरखाव नहीं किया जाता है, तो यह सूक्ष्म जीवाणु मरीज के शरीर में सांस के द्वारा प्रवेश कर ब्लेक फंगस का कारण बनते है।
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ऑक्सीजन कन्संट्रेटर के लिए डिस्टिल वाटर ही उपयोगी रहता है। हम 500 लीटर नगर निगम को उपलब्ध करा चुके है। एक हजार लीटर की मांग आई है और आगे भी मांग के अनुसार पूर्ति करते रहेंगे।
एनके जैन, अध्यक्ष
जोधपुर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन