
जोधपुर।
राजस्थान इन दिनों स्वाइन की जकड़ में है। तमाम सरकारी प्रयासों और दावों के बीच पॉज़िटिव मरीज़ों और मौतों का आंकड़ा दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। सबसे गंभीर बात तो ये है कि इस खतरनाक बिमारी से सबसे बुरी स्थिति सीएम अशोक गहलोत के गृह क्षेत्र जोधपुर की है।
स्वाइन फ़्लू की जद में जोधपुर
स्वाइन फ्लू के कहर ने साल 2018 में संभाग में 49 लोगों की जान ले ली। इनमें से 29 मौत संभाग के सबसे बड़े जोधपुर स्थित मथुरादास माथुर अस्पताल में हुई। चिकित्सा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार संभाग में 1 जनवरी से 31 दिसम्बर 2018 तक 1727 सैम्पलों की जांच की गई। इनमें से 282 मरीजों की रिपोर्ट स्वाइन फ्लू पॉजीटिव आई। सबसे अधिक 126 पॉजीटिव मरीज दिसम्बर में सामने आए। गत वर्ष जनवरी में 73, फरवरी में 36, मार्च में 14, सितम्बर में 5, अक्टूबर में 14, नवम्बर में 14 मरीज सामने आए थे। साल 2015 में संभाग में स्वाइन फ्लू से 30 लोगों की मौत हुई थी।
सच्चाई छिपाने में लगा चिकित्सा विभाग
बीते वर्ष स्वाइन फ्लू के पॉजीटिव मरीज और इससे होने वाली मौत के आंकड़े जारी करने में चिकित्सा विभाग भी हिचकिचाता रहा। जयपुर से चिकित्सा विभाग के अफसर जोधपुर पहुंचे और बैठक में चर्चा हुई कि मीडिया में अलग-अलग आंकड़े कैसे आ रहे हैं?
वरिष्ठ अफसरों ने मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायलॉजी लैब और सीएमएचओ के जरिए पॉजीटिव मरीजों और व मृत्यु के आंकड़े जारी करने के निर्देश दिए। इसके बाद भी अफसर यह सोचकर वास्तविक आंकड़े बताने से हिचकते रहे कि इससे स्वाइन फ्लू को लेकर आमजन में दहशत फैल जाएगी।
चिकित्सा विभाग से मिली जानकारी में उन्हीं मरीजों को शामिल किया गया है जिनकी जांच डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज की लैब से हुई। निजी अस्पतालों में गत वर्ष स्वाइन फ्लू के कितने मरीज आए और कितनी मौतें हुई, इसकी पुख्ता जानकारी विभाग की रिपोर्ट में शामिल नहीं है।
... इधर, साल के पहले दिन भी जोधपुर में ही एक की मौत
स्वाइन फ्लू ने साल 2019 के पहले दिन जोधपुर शहर के एक और मरीज की जान ले ली। बाइजी तालाब क्षेत्र निवासी लक्ष्मण (45) की मौत के बाद इस इलाके में स्वाइन फ्लू को लेकर भय का माहौल है। इस क्षेत्र में दिसंबर माह में दो जनों की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई थी।
साल 2019 के पहले दिन शहर में 7 नए पॉजीटिव मरीज सामने आए। इनमें तीन महिला व 4 पुरुष हैं। बाइजी तालाब क्षेत्र में स्वाइन फ्लू से तीन जनों की मौत के बाद मंगलवार शाम लोग घांचियों की बगीची में एकत्र हुए और मोमबत्तियां जलाकर रोष जताया।