
जोधपुर. विश्व के 150 से अधिक देशों में खौफ के साए में लोगों को जीने पर मजबूर करने वाले कोरोना वायरस की फिलहाल कोई दवा नहीं है। चिकित्सक इसमें मरीज के लक्षण के आधार पर उसे ट्रीटमेंट दे रहे हैं। मुख्य रूप से इसमें मरीजों को स्वाइनफ्लू के समय काम ली जाने वाली टेमीफ्लू, मलेरिया की दवा क्लोरोफिन और एंटी एचआइवी की दवाइयां देकर मरीजों का उपचार किया जा रहा है। हालांकि गनीमत है कि जोधपुर में फिलहाल कोई कोरोना वायरस पीडि़त मरीज भर्ती नहीं हुआ है, जो भी आए वे संदिग्ध आए और बाद में उनकी रिपोर्ट नेगेटिव निकली।
संदिग्धों को सबसे पहले टेमीफ्लू
इन दिनों अस्पताल में आने वाले कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों को सबसे पहले टेमीफ्लू दी जाती है। जबकि इस दवा का उपयोग स्वाइनफ्लू बी के लक्षण दिखने पर भी किया जाता है। जोधपुर में एक कोरोना वायरस संदिग्ध महिला की जांच में स्वाइनफ्लू भी निकल चुका है। गांवों में कई स्वास्थ्य केन्द्रों पर स्वाइन फ्लू बी लक्ष्ण दिखने पर टेमीफ्लू दी जाती है। स्वाइनफ्लू व कोरोना वायरस दोनों ही बीमारी में मरीजों को आइसोलेशन में रहने की सलाह दी जाती है। कई मरीज घर में होते है, उन्हें एकांत में रहकर उपचार की सलाह दी जाती है।
फिलहाल कोई दवा अपू्रव्ड नहीं
इसमें फिलहाल मरीजों को सर्पोटिव ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। बुखार है तो उसको पॅराशिटामॉल दी जाती है। सांस लेने में तकलीफ है तो ऑक्सीजन देना या वेंटिलेटर पर लिया जा रहा है। ये सभी एक्सप्रीमेंटल है। जयपुर में तीन तरह की दवाइयां दी गई है। एचआइवी में काम लुक्निावीर व रेक्टोनावीर दवाई दी गई है। तीसरा मलेरिया में काम आने वाली क्लोरोफिन दवाइयां दी गई है। चाइना में क्लोरोफिन का इस्तेमाल किया गया है। क्योंकि क्लोरोफिन कई तरह के वायरल इंफेक्शन में काम आती है। हालांकि इंडियन गाइड लाइन, आइसीएमआर व डब्ल्यूएचओ की गाइड लाइन में दवाइयों को शामिल नहीं किया गया है। कई स्टडी कहती है कि टेमीफ्लू दवा भी स्वाइनफ्लू में ज्यादा कारगर नहीं होती है, जो मरीज ठीक होना होता है, वे अपनेआप या सर्पोटिव उपचार से ठीक हो रहे हैं।
- डॉ. गोपाल कृष्ण बोहरा, एसोसिएट प्रोफेसर, जनरल मेडिसिन, एम्स जोधपुर