
अमित दवे/जोधपुर. जोधपुर में टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार और विकास के साथ उद्यमियों को नई इकाइयां लगाने के लिए जमीन नहीं मिल रही है। रंगाई-छपाई के काम में महारत कारीगरों व टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े उद्यमियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उत्तम क्वालिटी के कपड़े का उत्पादन होने के कारण निर्यात की दृष्टि से जोधपुर का राज्य में पहला स्थान है, टेक्सटाइल का काम बढऩे से वर्तमान इकाइयों पर भार बढ़ रहा है। पाली-बालोतरा का अधिकांश कपड़ा चोरी-छिपे जोधपुर आ रहा है। इससे अवैध धुलाई को भी बढ़ावा मिल रहा है। नया औद्योगिक क्षेत्र नहीं होने से कई नए उद्यमी काम शुरू नहीं कर पा रहे हंै।
देरी से मिल रही एनओसी
उद्यमी को नई टैक्सटाइल फैक्ट्री खोलने के लिए राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। जोधपुर स्थित बोर्ड के कार्यालय से केवल 50 किलो लीटर प्रतिदिन (केएलडी) पानी प्रतिदिन डिस्चार्ज की अनुमति मिलती है, जबकि इससे ज्यादा की अनुमति के लिए बोर्ड के जयपुर स्थित मुख्यालय से एनओसी जारी की जाती है। जहां उद्यमियों को कागजी औपचारिकताएं व कमियां बताकर देरी कर दी जाती है। कई उद्यमी तो नई फैक्ट्री खोलने की बजाए विभाग के चक्कर में ही उलझ जाते हैं। यही अनापत्ति प्रमाण पत्र जोधपुर स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जारी किए जाए तो उद्यमियों का काफी काम आसान हो जाता है।
इनका कहना है
हैण्डीक्राफ्ट के बाद टेक्सटाइल जोधपुर का बढ़ता हुआ उद्योग है। सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। लंबे समय से इस उद्योग को प्रोत्साहन की जरूरत है।
अशोक बाहेती, अध्यक्ष, जोधपुर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
उद्यमी कई वर्षों से टेक्सटाइल पार्क की उम्मीदें लगाए बैठे हैं, लेकिन हर बार निराशा हाथ लगी है। अब जेपीएनटी प्लांट की कैपिसिटी पूरी हो चुकी है। इस वजह से ट्रस्ट उद्यमियों को नई फैक्ट्रियां लगाने के लिए मेम्बरशिप नहीं दे रहा है। नया औद्योगिक क्षेत्र मिलता है तो आधुनिक मशीनरी के साथ टेक्सटाइल पार्क स्थापित होगा, अन्यथा यह सपना ही रहेगा।
मनोहरलाल खत्री, टेक्सटाइल उद्यमी
फेक्ट फाइल: टेक्सटाइल उद्योग
कुल इकाइयां----------- 350
जेपीएनटी से जुड़ी इकाइयां----- 292
छोटे-बड़े उद्यमी---------- करीब 400
उद्योग से जुड़ी लेबर--------- 10-12 हजार
प्रतिदिन उत्पादन----------- 8-10 लाख मीटर कपड़ा
सालाना टर्न ओवर---------- 20-25 करोड़ रुपए