
अमित दवे/जोधपुर. भारत-पाकिस्तान के बीच चलने वाली साप्ताहिक थार लिंक एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 14889/90) बंद हुए 4 माह से अधिक हो गए। इससे दोनों देशो के वे लोग खासे निराश हैं जिनके रिश्ते इस ट्रेन की वजह से प्रगाढ़ हुए थे। गत 16 अगस्त को भगत की कोठी उपनगरीय रेलवे स्टेशन से इस यात्री गाड़ी का संचालन पूर्णतया बंद कर दिया गया था। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 निष्क्रिय करने के बाद भारत-पाक संबंधों में तनाव का असर ‘रिश्तों की रेल’ थार लिंक एक्सप्रेस पर दिखा। इस ट्रेन का आखिरी फेरा 9 अगस्त को मध्य रात्रि को भगत की कोठी से पाकिस्तान गया था। वापसी में पाकिस्तान से 10 अगस्त की मध्य रात्रि को रवाना होकर 11 अगस्त रविवार को जोधपुर आया था।
2006 से चल रही थी दोस्ती की ट्रेन
1965 के युद्ध से पहले भारत-पाकिस्तान के बीच में रेल का संचालन जोधपुर से कराची तक होता था। युद्ध में रेल पटरियां क्षतिग्रस्त होने और दोनों देशों के बीच तनाव से रेलमार्ग को बंद कर दिया गया। 41 साल बाद 18 फरवरी, 2006 को इस ट्रेन को वापस शुरू किया गया। इस वर्ष के फरवरी-मार्च माह में पुलवामा आतंकी हमला व सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बने तनावपूर्ण माहौल के बावजूद ट्रेन का संचालन जारी रहा।
यात्रियों की सुरक्षा के होते थे विशेष इंतजाम
थार के लिए रेलवे की ओर से विशेष स्टाफ नही लगाया गया था। जिस दिन थार एक्सप्रेस संचालित होती थी उस दिन पाक जाने वाले यात्रियों के लिए ही बुकिंग होती थी। रेलवे सहित अन्य सुरक्षा एजेन्सियों की ओर से थार के संचालन के समय विशेष सुरक्षा व्यवस्था की जाती थी। ट्रेन की रवानगी व वापसी में आरपीएफ, जीआरपी, सिविल पुलिस, सीआइडी, आइबी की ओर से यात्रियों की जांच व सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम होते थे।
अगस्त माह में यात्रियों की स्थिति
तिथि------ भारतीय ---- पाकिस्तानी --- कुल यात्री
3 अगस्त -- 137----- 128-------- 266 भारत से गए
4 अगस्त -- 137----- 232-------- 369 भारत आए
10 अगस्त-- 81------ 84-------- 165 भारत से गए
11 अगस्त-- 98------- 58------ 156 भारत आए
इनका कहना है
थार एक्सप्रेस के संचालन से रेलवे को वित्तीय लाभ भी नहीं हो रहा था। इस ट्रेन में विशेष श्रेणी की सीटिंग व्यवस्था नहीं होने से टिकट की एक ही दर निर्धारित थी। यह ट्रेन न घाटा-न मुनाफा अवधारणा पर चल रही थी।
- गोपाल शर्मा, प्रवक्ता, जोधपुर रेल मण्डल