
फलोदी . फलोदी शहर सहित कई गांवों को हिमालय के पानी की आपूर्ति करने वाली कृत्रिम झील पर संकट के बादल मंडराने शुरू हो गए है। दरअसल, झील के एक हिस्से से पानी का रिसाव होना शुरू हो गया है। इससे झील के मुख्य द्वार के निकट जमीन का काफी हिस्सा भीगा रहने लगा है। वहीं दूसरी तरफ झील से लगातार हो रहे पानी के रिसाव के चलते झील के ऊपर जमीन पर भी जगह-जगह दरारें नजर आने लगी है। झील के रिसाव क्षेत्र में पुरानी दीवार पर की गई सीमेंट की टीपें भी उखड़ रही है।
कुछ ऐसे नजर आ रहा है रिसाव
झील के मुख्य द्वार के निकट स्थित मंदिर के पास झील से काफी दूरी तक जमीन भीगी हुई है तथा पिछले कुछ दिनों से लगातार झील से पानी का रिसाव हो रहा है। साथ ही झील की पुरानी दीवार पर पत्थरों के बीच की गई सीमेंट की टीपें भी उखड़ रही है। संभवतया यहीं से पानी का रिसाव हो रहा है तथा यहां से होते हुए पानी बाहर की तरफ जमीन पर नजर आ रहा है।
फलोदी-बावड़ी कलां-खारा-जालोड़ा योजना में बनी है झील
फलोदी में कृत्रिम झील (इंटेक वेल) फलोदी-बावड़ी कलां-खारा-जालोड़ा पेयजल योजना के तहत बनाई गई है। यहां अलग-अलग तीन तालाबों को मिलाकर झील का निर्माण किया गया था। इस पूरी पेयजल योजना में करीब 121 करोड़ की लागत आई है। परियोजना में फलोदी शहर सहित 43 गांवों में जलापूर्ति होती है।
धंस रहे घाट, टूटी पड़ी दीवारें
जहां एक तरफ इस झील को पर्यटन के लिए उपयोग करने की बात की जा रही है, तो वहीं दूसरी तरफ झील का निर्माण पूरा होने के कुछ ही सालों बाद जगह-जगह से दीवारें बिखरने लगी है। 2017 में झील की दीवार पर बनाया गया सीमेंट एक बड़ा हिस्सा भी ढह गया था। वहीं झील के पुराने हिस्से के घाट के हालात तो बद-बदतर होते जा रहे है। जहां घाट टूटे पड़े है और जमीन पर लगे पत्थर धंस रहे है। यहां काफी लोग घूमने आते है। ऐसे में यहां हादसे का खतरा भी बना हुआ है।
पुरानी दीवार से हो रहा है रिसाव
झील के पूर्व में जल संसाधान विभाग द्वारा निर्माण करवाए गए हिस्से में दीवार से पानी का हल्का रिसाव हो रहा है। जल्द ही झील में पानी का स्तर कम करवाकर दीवार की मरम्मत करवाई जाएगी। साथ ही अन्य स्थानों पर टूटी दीवारों आदि जगहों का अवलोकन करके मरम्मत करवाई जाएगी।
रविन्द्र चौधरी, अधिशासी अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग,
परियोजना खण्ड, फलोदी