जोधपुर

Dussehra 2022: .जोधपुर में है अनूठा रावण मंदिर जहां गूंजते है लंकेश के जयकारे ….. जानिए पूरी जानकारी

मंदोदरी का भी होता है पूजन, दशानन दहन के बाद शोक मनाते है श्रीमाली ब्राह्मणों में गोधा गोत्र के लोग
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Oct 05, 2022
Dussehra 2022:  लंकेश के जयकारों से रोजाना गूंजता है जोधपुर का मंदिर....
Dussehra 2022: लंकेश के जयकारों से रोजाना गूंजता है जोधपुर का मंदिर....

जोधपुर. सूर्यनगरी जोधपुर के विद्याशाला किला रोड पर रावण और मंदोदरी का मंदिर है , जिसमें नियमित पूजन के दौरान समूचा परिसर लंकेश के जयकारों से गूंजता है। मंदिर परिसर में रावण और मंदोदरी के अलावा रावण की आराध्य देवी खरानना की मूर्ति भी स्थापित है । श्रीमाली ब्राह्मणों में गोधा गोत्र विशेष के लोग रावण की पूरी श्रद्धापूर्वक पूजा अर्चना करते हैं । दशानन मंदिर में करीब साढ़े छह फीट लंबी और डेढ़ टन वजनी रावण की प्रतिमा को शिवलिंग पर जलाभिषेक करते वर्ष 2007 में छीतर पत्थर को तराश कर बनाया गया था ।

रावण के मंदिर के ठीक सामने मंदोदरी की मूर्ति है । मंदिर के पुजारी कमलेश व अजय दवे ने बताया कि श्रीमाली ब्राह्मणों में दवे गोधा खांप से संबंध रखने वाले कुछ लोग रावण की आराध्य देवी खरानना को कुलदेवी के रूप में पूजते हैं । इनकी आस्था है कि मंदोदरी जोधपुर की ही थी ।

विजयदशमी को दहन के बाद स्नान

देश् भर रावण का दहन होने के बाद भले ही आतिशबाजी कर खुशियां मनाई जाती हो लेकिनविजयदशमी को रावण व उसके परिजनों के पुतले का दहन होने के बाद जोधपुर में दवे गोधा खांप वाले ब्राह्मणों के कुछ परिवार तो शोक मनाते है। शुद्धिकरण के लिए स्नान कर नवीन यज्ञोपवीत धारण करने के बाद पूजन कर भोजन करते हैं । कुछ परिवार अपने पूर्वजों का रावण से रिश्ता मानकर इस परम्परा का निर्वहन करते आ रहे हैं ।

जोधपुर के प्राचीन ग्रंथ चित्र में गदर्भ मुख

राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान जोधपुर में सन 1649-50 में लिपिबद्ध आर्ष रामायण ग्रंथ मं चित्रांकित रावण का शीश गदर्भ का बताया गया है। प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी डॉ कमल किशोर सांखला के अनुसार मेवाड़ के महाराणा जगतसिंह के काल में लिपिबद्ध आर्ष रामायण अरण्यकाण्ड में लंकापति रावण का सिर गदर्भ का दिखाया हुआ है।

जोधपुर से रावण का गहरा नाता

जनश्रुति एवं किवदंती के अनुसार मंदोदरी जोधपुर के मंडोर की राजकुमारी बताकर कई समूह मंडोर क्षेत्र को रावण की ससुराल मानते हैं । दावा यह भी करते है की मंडोर क्षेत्र में प्राचीन एक चंवरी जहां रावण ने फेरे लिए वह आज भी मौजूद है। हजारों साल प्राचीन चंवरी में अष्टमातृका व गणेश की मूर्ति है । कुछ इतिहासकार मंडोर में रावण की चंवरी को राव नी चंवरी बताते है।

Published on:
05 Oct 2022 01:55 pm